purush ki 72, stree ki 64 kya hai
“पुरुष की 72” और “स्त्री की 64” – ये जैन धर्म में पुरुष के 72 दोष और स्त्री के 64 दोष के रूप में बताए जाते हैं।
इनका अर्थ:
- ये कोई गुण या ख़ास शक्तियाँ नहीं हैं।
- ये शरीर, व्यवहार और स्वभाव से जुड़े दोष / कमियाँ हैं,
क्यों बताए गए हैं?
- साधु–साध्वियों के लिए आचार–ग्रंथों में यह विस्तार से आता है।
- उद्देश्य यह है कि:
संक्षेप में:
- पुरुष के 72 दोष = पुरुष शरीर व स्वभाव की विस्तृत कमियाँ
- स्त्री के 64 दोष = स्त्री शरीर व स्वभाव की विस्तृत कमियाँ
- इनका प्रयोग मुख्यतः वैराग्य जगाने के लिए किया जाता है,
पूरी सूची बहुत लम्बी और तकनीकी होती है, इसलिए सामान्यत: प्रवचन में केवल इतना बताया जाता है कि यह सब शरीर–मोह तोड़ने के साधन हैं, मकसद केवल आत्मा की ओर मोड़ना है।