Saatvi narak walo ki ek maatra gati kaunsi
सातवीं नरक वालों की केवल एक ही आगे की गति – तिर्यंच गति होती है।
अर्थात् जो जीव सातवीं नरक (सातवीं पृथ्वी) से निकलते हैं, वे अगला जन्म सिर्फ़ तिर्यंच (पशु‑पक्षी आदि) के रूप में ही लेते हैं; वे सीधे मनुष्य, देव या फिर से नरक में नहीं जाते।
और विशेष बात (जैसा आचार्य परंपरा में कहा गया है):
- सातवीं नरक से निकलने वाले जीव