Ek sharir jo stree ko kabhi nahi milta
जैन दर्शन के अनुसार “एक शरीर जो स्त्री को कभी नहीं मिलता” – यह बात दिगंबर परम्परा में प्रायः “आहारक शरीर (Aharak Sharir)” के लिए कही जाती है।
बहुत सरल भाषा में:
- जीव के कई प्रकार के शरीर माने गए हैं – औदारिक, वैक्रिय, तैजस, कर्मण, आहारक आदि।
- आहारक शरीर एक बहुत सूक्ष्म, विशेष प्रकार का शरीर है,
- दिगंबर मत के अनुसार स्त्री को
- श्वेतांबर मत में स्त्री केवली और तीर्थंकर दोनों हो सकती है,
संक्षेप में: दिगंबर परम्परा के अनुसार – “स्त्री को आहारक शरीर कभी नहीं मिलता।”