3. एक मात्र कर्म जो चरम शरीर नहीं बाँधता –
उत्तर: एक मात्र कर्म जो चरम शरीर (आख़िरी जन्म के शरीर) को नहीं बाँधता है, वह है – आयुष्य कर्म (आयु कर्म)।
सरल अर्थ: चरम देह में जीव की भविष्य की कोई और देह नहीं बननी, इसलिए उसके लिए नया आयुष्य कर्म नहीं बँधता। बाकी नाम आदि कर्म तो चरम शरीर तक बँध सकते हैं, पर नया आयुष्य कर्म नहीं बँधता।