Aaudaarik sharir kya hai
आउदारिक शरीर (Audārik Sharir) का आसान अर्थ:
- साधारण परिभाषा
- जो हमारा यह दिखाई देने वाला, छूने में आने वाला, मोटा‑सा शरीर है – इसे जैन दर्शन में आउदारिक शरीर कहा जाता है। - “आउदारिक” मतलब – स्थूल / मोटे कणों (स्थूल पुद्गल) से बना हुआ शरीर।
- किनको आउदारिक शरीर होता है?
- मनुष्य (इंसान) - तिर्यंच जीव – जैसे पशु, पक्षी, कीड़े‑मकौड़े, बहुत‑सी वनस्पतियाँ आदि इन सबका बाहरी देह‑रूप शरीर आउदारिक शरीर है।
- अन्य शरीरों से फर्क
जैन दर्शन में पाँच प्रकार के शरीर बताए हैं: - आउदारिक शरीर – हमारा यह स्थूल/भौतिक शरीर - वै크्रिया शरीर – देव और नरक के जीवों का सूक्ष्म रूप बदलने वाला शरीर - आहारक शरीर – बहुत ऊँचे साधु विशेष कार्य हेतु बनाते हैं - तेजस शरीर – भीतर की अग्नि/ऊर्जा वाला, पाचन आदि कराता है - कर्म शरीर – सूक्ष्म कर्म कणों से बना, जो आत्मा से हमेशा जुड़ा रहता है
इनमें से जो मोटा, दिखने‑छूने में आने वाला है, वही आउदारिक शरीर है।
- जैन दृष्टि से महत्व
- यह शरीर शरीर‑नाम‑कर्म के फल से मिलता है। - यही शरीर धर्म, तप, संयम करके कर्मों का नाश करने का साधन बन सकता है। - इसलिए जैन धर्म में सिखाया जाता है कि इस शरीर का उपयोग आत्मकल्याण के लिए करना चाहिए, न कि केवल भोग‑विलास के लिए।
संक्षेप में: जो शरीर आप अभी देख रहे हैं, जिसका वजन है, जो जन्म‑मरण में बदलता है – वही आपका आउदारिक शरीर है।