aaj upyogi kal raddi
“आज उपयोगी, कल रद्दी” एक सरल लेकिन बहुत गहरी बात है, जो जैन धर्म के वर्तमान क्षण के महत्व पर जोर देती है।
सरल अर्थ:
- आज जो समय, शक्ति, धन, अवसर और जीवन-श्वास तुम्हारे पास है, अगर उसे धर्म, आत्मकल्याण और सदुपयोग में नहीं लगाओगे,
- तो कल ये सब या तो बदल जाएगा, खत्म हो जाएगा, या तुम्हारे किसी काम का नहीं रहेगा – जैसे पुराने अख़बार की रद्दी।
जैन दृष्टि से इसका भाव:
- वर्तमान ही वास्तविक है – भूत (अतीत) चला गया, भविष्य अनिश्चित है। साधना, पाप छोड़ना, पुण्य करना – सब केवल अभी संभव है।
- प्रत्येक क्षण अनमोल है – हर क्षण में कर्म बंध भी हो सकता है और कर्म क्षय भी। इसलिए आज को टालकर “कल देखेंगे” कहना आध्यात्मिक दृष्टि से बहुत हानिकारक है।
- आलस्य छोड़ो, जागृति अपनाओ – जो धर्म “कभी बाद में करेंगे” कहते-कहते जीवन निकाल देते हैं, उनके लिए आज की उपेक्षा, सच में कल “रद्दी” जैसी साबित हो सकती है।
इसीलिए आचार्य और प्रवचनकार बार‑बार कहते हैं:
- आज से ही:
यही “आज उपयोगी, कल रद्दी” का जैन भाव है – आज को धर्म के लिए उपयोगी बना लो, नहीं तो कल यह व्यर्थ चला जाएगा।