sudharshana ji ne konsi parampara ki shuruwat ki
सुधर्मा जी (जिन्हें आप “सुधर्शन जी” कह रहे हैं) ने
भगवान महावीर की साधु‑परंपरा / श्रमण‑परंपरा (आचार्य‑परंपरा) की शुरुआत की मानी जाती है।
भगवान महावीर के निर्वाण के बाद
- उन्होंने ही संघ के प्रथम पट्टधर (मुख्य आचार्य) के रूप में
- मुनियों की परंपरा, आचार्य‑परंपरा को आगे बढ़ाया।
इसी कारण कहा जाता है कि आज तक चल रही जैन मुनि‑परंपरा की शुरुआत गणधर सुधर्मा स्वामी से मानी जाती है।
श्वेताम्बर परंपरा में तो यह बात स्पष्ट रूप से कही जाती है, और दिगंबर परंपरा में भी साधु‑परंपरा को आगे बढ़ाने में सुधर्मा स्वामी का ही आरंभिक स्थान माना जाता है।