aahar pachane wala ek matra sharir
“आहार पचाने वाला एक मात्र शरीर” से जैन दर्शन में औदारिक शरीर (आउदारिक शरीर) का ही संदर्भ लिया जाता है।
संक्षेप में:
- जीव के पाँच प्रकार के शरीर माने गए हैं –
- औदारिक शरीर – यही हमारा स्थूल/भौतिक शरीर है, जो दिखाई देता है, जिसे भूख लगती है, जो भोजन ग्रहण करता है और आहार को पचाता है।
- तेजस शरीर पाचन में सहायक सूक्ष्म ऊर्जा-जैसी भूमिका निभाता है, पर सीधे “आहार पचाने वाला” कहें तो उत्तर – औदारिक शरीर ही माना जाता है।
अगर आप जैन शरीर–विज्ञान (पाँच शरीर) विस्तार से पढ़ना चाहें, तो आप यह लेख देख सकते हैं