22 parishah ke naam
22 पारिषह (Parishah) के नाम इस प्रकार हैं:
- क्षुधा पारिषह – भूख
- पिपासा पारिषह – प्यास
- शीत पारिषह – ठंड
- उष्ण पारिषह – गर्मी
- दंश‑मशक पारिषह – कीड़े‑मकौड़ों के काटने आदि की तकलीफ
- अचल / अचेल्य / नग्नता पारिषह – वस्त्र आदि का अभाव
- आरति पारिषह – अरुचि, ऊब, उदासीनता
- स्त्री पारिषह – स्त्री‑पुरुष आकर्षण, काम‑विकार
- चर्या पारिषह – लगातार चलना‑फिरना, भ्रमण की तकलीफ
- निषेध / निषद्य / निवास‑निषेध पारिषह – रहने‑बैठने से रोक, प्रताड़ना
- शय्या पारिषह – कठोर या असुविधाजनक आसन‑शय्या
- आक्रोश पारिषह – गाली‑गलौज, अपमान
- वध पारिषह – मार‑पीट, शारीरिक कष्ट
- याचना पारिषह – बार‑बार मांगना, भीख माँगनी पड़ना
- अलाभ पारिषह – अपेक्षित वस्तु/फल न मिलना
- रोग पारिषह – बीमारी, शारीरिक कष्ट
- तृण‑स्पर्श पारिषह – घास‑काँटों आदि की चुभन सहना
- मल पारिषह – गंदगी, मैल, अस्वच्छता सहना
- सत्कार‑पुरस्कार (साकार) पारिषह – सम्मान‑आदर मिलने पर भी समता रखना
- प्रज्ञा (बुद्धि) पारिषह – अपनी बुद्धि, ज्ञान पर अभिमान न आने देना
- अज्ञान (अन्नान) पारिषह – अज्ञान, भ्रम, शंका की स्थिति सहना
- दर्शन पारिषह – सम्यक्दर्शन में डगमगाहट, विरोध, बाधाएँ सहकर भी श्रद्धा बनाए रखना
इन 22 पारिषहों को समता से सहने से कर्मों का क्षय होता है और साधक मोक्ष‑मार्ग पर दृढ़ होता है।