kewli kya nai dekhte
“केवली क्या नहीं देखते?” – बहुत अच्छा आध्यात्मिक सवाल है।
जैन दर्शन के अनुसार:
- केवली भगवान क्या “देखते” हैं?
“देखना” यहाँ मतलब जानना (ज्ञान) है, आँखों से देखना नहीं। केवली भगवान के पास केवलज्ञान होता है – - सारे द्रव्य (जीव‑अजीव) - उन सबके अनंत पर्यायें/भाव - तीनों काल – भूत, वर्तमान, भविष्य – सबको एक साथ, पूर्ण रूप से जानते हैं। इसलिए सिद्धांत से कहा जाता है: केवली के लिए कुछ भी अज्ञात नहीं रहता।
- तो फिर केवली क्या “नहीं देखते”?
वस्तु की दृष्टि से – - कोई भी वस्तु, कोई भी भाव, कोई भी देश‑काल ऐसा नहीं है जिसे केवली न जान सके।
लेकिन स्वभाव की दृष्टि से केवली में: - अज्ञान नहीं रहता - राग‑द्वेष नहीं रहते - मोह नहीं रहता
यानी - वे अज्ञान को नहीं रखते (उनमें अज्ञान की उपस्थिति नहीं) - राग‑द्वेष को नहीं अपनाते (उनका स्वभाव शुद्ध, निर्मल है)
परन्तु: - अन्य जीवों के अज्ञान, राग‑द्वेष आदि को भी वे पूर्ण रूप से जानते हैं, बस स्वयं उनमें लिप्त नहीं होते।
- संक्षेप में
- ज्ञेय (जानने योग्य) ऐसी कोई चीज़ नहीं जो केवली से छिपी हो। - “नहीं देखना” का अर्थ है – उनके अपने आत्मभाव में अशुद्धि, मोह, राग‑द्वेष का अभाव है, केवल शुद्ध चैतन्य स्वरूप ही है।
इसलिए जैन सिद्धांत के अनुसार उत्तर है: केवली ज्ञान से तो सब कुछ देखते हैं, पर अपने स्वभाव में अज्ञान, राग‑द्वेष, मोह – यह कुछ भी “नहीं रखते / नहीं देखते”।