Kya mooli k patte jamikand hote h
साधारण भाषा में:
- “जमीकंद” वो सब्ज़ियाँ हैं जो मिट्टी के अन्दर गाँठ/कन्द के रूप में बनती हैं – जैसे आलू, प्याज़, लहसुन, मूली का सफ़ेद हिस्सा, गाजर आदि।
- मूली के पत्ते ज़मीन के ऊपर उगते हैं, वे स्वयं जमीकंद नहीं हैं, बल्कि हरी पत्तेदार सब्ज़ी की तरह माने जाते हैं।
जैन दृष्टि से
- सिद्धान्त के हिसाब से जमीकंद पर मुख्य आपत्ति उसकी अन्दर वाली गाँठ/जड़ पर होती है, पत्तों पर नहीं।
- इसलिए बहुत‑से जैन परिवार केवल मूली की जड़ (सफ़ेद हिस्सा) नहीं खाते, पर पत्ते कुछ लोग खाते हैं।
- लेकिन कुछ घरानों/संप्रदायों में नियम कड़ा होता है – वे पूरी मूली (जड़ + पत्ता) से ही बचते हैं, ताकि कोई शंका न रहे।
इसलिए उत्तर यह है: नहीं, मूली के पत्ते अपने‑आप में “जमीकंद” नहीं हैं, पर उन्हें खाना या न खाना आपकी परंपरा और आपके आचार्य/गुरुदेव के निर्देश पर निर्भर होना चाहिए।