18 pap me vilom shabdh
18 पापों के “विलोम शब्द” यानी उनके ठीक उलटे गुण (पुण्य‑स्वभाव) इस तरह समझ सकते हैं:
- प्राणातिपात (हिंसा) – विलोम: अहिंसा, प्राणी‑दया
- मृषावाद (झूठ बोलना) – विलोम: सत्य, सच्ची वाणी
- अदत्तादान (चोरी) – विलोम: अचौर्य, ईमानदारी, जो दिया गया हो वही लेना
- मैथुन (असंयम, कामाचार) – विलोम: ब्रह्मचर्य, इन्द्रिय‑संयम
- परिग्रह (अधिक संग्रह, आसक्ति) – विलोम: अपरिग्रह, सादगी, संतोष
- क्रोध – विलोम: क्षमा, शांति
- मान (अहंकार, घमंड) – विलोम: विनय, नम्रता
- माया (छल, कपट) – विलोम: सरलता, निष्कपटता
- लोभ (लालच) – विलोम: संतोष, त्याग
- राग (अति आसक्ति, मोह) – विलोम: विराग, वैराग्य
- द्वेष (घृणा, बैरभाव) – विलोम: मैत्री, शुभभावना
- कलह (झगड़ा, लड़ाई) – विलोम: सौहार्द, मेल‑मिलाप
- अभ्याख्यान (झूठा आरोप) – विलोम: सही प्रशंसा, न्यायपूर्ण कथन
- पैशुन्य (चुगली, निंदा) – विलोम: पर‑गुण‑ग्राहकता, शुभ चर्चा
- रति‑अरति (अति पसंद/नापसंद, पक्षपात) – विलोम: समता, निष्पक्षता
- पर‑परिवाद (दूसरों में ही दोष देखना) – विलोम: आत्म‑परिक्षण, अपने दोष देखना
- माया‑मृषावाद (कपट से झूठ बोलना) – विलोम: सरल‑सत्य वाणी, निष्कपट बोल
- मिथ्यात्व (कु‑दृष्टि, सही धर्म में अविश्वास) – विलोम: सम्यक‑दर्शन (सही श्रद्धा), तत्त्वों में आस्था
इन पापों से दूर रहकर, उनके विलोम गुणों को अपनाना ही आत्मा की शुद्धि और मोक्ष‑मार्ग है। 18 पापों की सरल सूची और व्याख्या आप यहाँ भी देख सकते हैं