Can abhavi jeev become parmadhami dev
संक्षिप्त उत्तर: नहीं, अभवी (अभाव्य) जीव कभी भी परमाधामी देव नहीं बन सकता।
थोड़ा विस्तार से:
- अभाव्य (Abhavi / Abhavya) जीव कौन?
- ऐसा जीव जो कभी भी सम्यक् दर्शन, सम्यक ज्ञान, सम्यक चरित्र प्राप्त नहीं कर सकता। - इसलिए वह मोक्ष भी कभी नहीं पा सकता। - यह स्थिति अनन्तकाल के लिए है – उसकी आत्मा में भव्यत्व की शक्ति नहीं रहती।
- परमाधामी देव कौन?
- उच्च देवलोकों के वे देव, जिनके लिए आगे की यात्रा मोक्ष की ओर निश्चित होती है (भव्यमान, मोक्षमार्ग में प्रबल कारणों वाले)। - परमाधामी देव होना स्वयं में भव्यत्व की पक्की निशानी है – यानी ऐसा देव आगे चलकर मोक्षमार्ग पर अवश्य अग्रसर होगा (चाहे इसी जन्म में न भी हो, पर सामर्थ्य निश्चित है)।
- क्यों अभवी जीव परमाधामी देव नहीं बन सकता?
- परमाधामी अवस्था = उच्च आध्यात्मिक क्षमता + भवितव्य मोक्ष। - अभवी जीव = मोक्ष की सर्वथा असमर्थ आत्मा। - जिस आत्मा में मोक्ष-सामर्थ्य ही नहीं, वह उस देव-स्थिति को कैसे पाएगी जो आगे कभी न कभी मोक्ष की गारंटी जैसा है? - इसीलिए तत्त्वज्ञान के अनुसार, परमाधामी देव अवश्य भव्य जीव ही होता है, अभव्य नहीं।
- दोनों परम्पराओं (दिगम्बर–श्वेताम्बर) की दृष्टि
- दोनों परम्पराएँ भव्य–अभव्य का भेद मानती हैं। - दोनों में ही अभव्य को सदा के लिए अमोक्षी माना गया है। - परमाधामी देव की कल्पना भी भव्य जीव के रूप में, मोक्ष-संभावना वाले देव के रूप में ही की जाती है। - व्यावहारिक रूप से, यह माना जाता है कि: - अभव्य = न सम्यक दर्शन, न मोक्ष, न परमाधामी-पद।
इसलिए सीधा निष्कर्ष: अभवी (अभाव्य) जीव कभी परमाधामी देव नहीं बन सकता, क्योंकि परमाधामी देव होना ही भव्यत्व और भविष्य में मोक्ष-सामर्थ्य का संकेत है।
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