Mahavir swami ke 23 ve bhav mein kitne khand ke adhipati the
इस विषय में जो जानकारी आप पूछ रहे हैं ( “भगवान महावीर स्वामी अपने 23वें भव में कितने खंड के अधिपति थे?”) उसका स्पष्ट व प्रमाणित उल्लेख मुझे परंपरागत जैन ग्रंथों की उपलब्ध सूचियों में नहीं मिल रहा है।
उपलब्ध परंपरागत सूची के अनुसार भगवान महावीर के 34 भवों में:
- 22वाँ भव – सिंह
- 23वाँ भव – प्रथम नरक (नरक जीव रूप में)
- 24वाँ भव – फिर से सिंह
- 20वें भव में वे त्रिपृष्ठ नारायण हुए, और अन्य भवों में चक्रवर्ती आदि के रूप भी आते हैं; इन पदों के संदर्भ में “खंडों के अधिपति” जैसी चर्चा मिलती है, पर विशेष रूप से “23वें भव” के बारे में “फलाँ‑फलाँ खंड के अधिपति” जैसा वाक्य मुझे किसी प्रामाणिक सूची में नहीं मिलता।
इसलिए मैं यह निश्चयपूर्वक नहीं कह सकता कि 23वें भव में वे कितने खंड के अधिपति बताए गए हैं — संभव है कि या तो 1) यह प्रश्न किसी विशेष लोक‑व्याख्या / प्रवचन परंपरा से जुड़ा हो, या 2) भव संख्या को लेकर किसी गणना में अंतर हो (कभी‑कभी नरक‑निगोद आदि असंख्य भवों की गिनती अलग‑अलग तरह से की जाती है)।
गलत या अटकलबाज़ी वाला उत्तर देना जैन धर्म की मर्यादा के विरुद्ध होगा, इसलिए इस बिंदु पर मैं निश्चित संख्या नहीं बता सकता।