सिद्धचकर विधान पर प्रश्न उत्तर
सिद्धचक्र विधान पर अक्सर पूछे जाने वाले कुछ सरल प्रश्न‑उत्तर नीचे दे रहा हूँ। भाषा बहुत आसान रख रहा हूँ ताकि घर‑घर में समझ आ सके।
---
1. सिद्धचक्र या नवपद क्या है?
उत्तर: सिद्धचक्र (या नवपद) एक पवित्र यन्त्र है, जिसमें 9 महान पद (नवपद) आते हैं:
- अरिहन्त
- सिद्ध
- आचार्य
- उपाध्याय
- साधु
- सम्यक दर्शन
- सम्यक ज्ञान
- सम्यक चरित्र
- तप
इसे मोक्ष‑मार्ग का मानचित्र मानकर पूजा‑अर्चना की जाती है। यह हमें बताता है कि सही श्रद्धा, सही ज्ञान, सही आचरण और तप से आत्मा शुद्ध होकर सिद्ध पद को प्राप्त कर सकती है। आप इसके बारे में और पढ़ सकते हैं
---
2. सिद्धचक्र विधान क्या होता है?
उत्तर: सिद्धचक्र विधान एक विशेष पूजन‑विधि है जिसमें सिद्धचक्र यन्त्र की पूजा, स्तुति, पाठ, अभिषेक आदि के द्वारा नवपद की आराधना की जाती है। इसमें मुख्यत:
- नवकार मंत्र,
- नवपद स्तवन/स्तोत्र,
- सिद्धचक्र स्तवन,
- श्रिपाल‑मायणासुन्दरी की कथा (कुछ परम्पराओं में)
---
3. सिद्धचक्र विधान कब करना उचित है?
उत्तर:
- किसी भी दिन श्रद्धा से किया जा सकता है।
- विशेष रूप से चैत्र और आश्विन की अयंबिल ओली (नवपद ओली) के 9 दिनों में अधिक होता है।
- परिवार की विशेष खुशी, मंगल कार्य, बीमारी से उबरने, शान्ति‑समृद्धि की भावना से भी लोग करवाते हैं।
---
4. सिद्धचक्र विधान का मुख्य लाभ (फायदा) क्या माना गया है?
उत्तर (धार्मिक दृष्टि से):
- पाप कर्मों का क्षय (कमी)
- श्रद्धा, ज्ञान, और आचरण में दृढ़ता
- मानसिक शान्ति, घर‑परिवार में सौहार्द
- कषाय (क्रोध, मान, माया, लोभ) में शिथिलता
- मोक्ष‑मार्ग की ओर झुकाव
---
5. सिद्धचक्र विधान में कौन‑कौन से मंत्र या पाठ ज़रूर होते हैं?
उत्तर (सामान्य रूप से):
- नवकार मंत्र (णमोकार मंत्र) – मूल और अनिवार्य।
- नवपद स्तुति / सिद्धचक्र स्तवन – नवपद की विशेष स्तुति।
- दशपद / सिद्धचक्र 10 मंत्र – कुछ परम्पराओं में:
- अरिहन्त - सिद्ध - आचार्य - उपाध्याय - साधु - दर्शन - ज्ञान - चरित्र - तप - शक्ति इनका मंत्ररूप पाठ: “अरिहन्तं, सिद्धं, आचार्यं, उपाध्यायं, साधुं, दर्शनं, ज्ञानं, चरित्रं, तप: , शक्ति:” – परम्परा अनुसार उच्चारण बदल सकता है। अधिक विवरण के लिए देखें
---
6. सिद्धचक्र विधान घर पर किया जा सकता है या सिर्फ़ मंदिर में?
उत्तर:
- दोनों जगह किया जा सकता है।
- शर्तें:
- घर पर साधारण रूप से – सिद्धचक्र यन्त्र (धातु/चित्र/चावल से बनाया) रखकर, नवकार मंत्र, नवपद स्तवन और साधारण पूजा‑विधि से भी आराधना की जा सकती है।
---
7. क्या सिद्धचक्र विधान श्वेताम्बर और दिगम्बर दोनों में होता है?
उत्तर:
- सिद्धचक्र / नवपद की भावना – दोनों परम्पराओं में आदर से स्वीकारी जाती है, क्योंकि इसका मूल नवकार मंत्र और पंच परमेष्ठी हैं।
- विधान की विस्तारपूर्वक विधि, स्तवन, कथा आदि – अधिकतर श्वेताम्बर सम्प्रदाय (विशेषकर तपागच्छ आदि) में प्रचलित रूप में मिलती है।
- दिगम्बर परम्परा में भी नवपद आराधना, नवकार मंत्र, पंच परमेष्ठी‑पूजन का स्वरूप है, पर “सिद्धचक्र विधान” नाम से विस्तृत गृह/मन्दिर‑विधान श्वेताम्बर परम्परा में अधिक प्रसिद्ध है।
---
8. क्या सिद्धचक्र विधान से सीधे चमत्कार हो जाते हैं?
उत्तर (शुद्ध जैन दृष्टि से):
- विधान स्वयं कोई जादू नहीं है।
- यह आंतरिक शुद्धि, श्रद्धा, भक्ति और कषाय‑क्षय का साधन है।
- परिणाम दो प्रकार से समझे जाते हैं:
---
9. सिद्धचक्र विधान के लिए क्या‑क्या तैयारियाँ करनी चाहिए?
उत्तर (संक्षेप में):
- शारीरिक‑मानसिक शुद्धि (स्नान, साफ वस्त्र, मन की शान्ति)
- शक्य हो तो –
- विधान स्थल की सफाई, जिनचित्र/प्रतिमा, सिद्धचक्र यन्त्र की व्यवस्थित स्थापना
- आवश्यक पूजन‑सामग्री: अक्षत, फूल, दीपक, धूप, अगर, जल, चन्दन आदि (जैसे आपकी परम्परा में हो)
---
10. क्या अकेला मनुष्य भी सिद्धचक्र विधान कर सकता है?
उत्तर:
- हाँ, यदि विधि का ज्ञान हो तो अकेले भी कर सकता है।
- सामूहिक रूप में (परिवार/समाज के साथ) करने से:
---
यदि आपको चाहिये तो अगले चरण में
- सिद्धचक्र विधान की “बहुत सरल घर‑बैठे करने लायक क्रमवार विधि”
- केवल “बच्चों को समझाने लायक छोटा सार”