bharat shetra ki drishti se अहार पहचानने वाला एक मात्र शरीर है in jainism
“अहार पहचानने वाला एक मात्र शरीर” – आपका प्रश्न जैन दर्शन के पाँच शरीर (शरीर / sharir) के संदर्भ में है, और आप विशेष रूप से भरत क्षेत्र (भारत क्षेत्र) की दृष्टि से जानना चाह रहे हैं।
भरत क्षेत्र की दृष्टि से यहाँ पर हम मानव, तिर्यंच (पशु–पक्षी आदि) जैसे स्थूल देह वाले जीवों की बात करते हैं। इनमें जो शरीर अहार (खाद्य) को पहचानता, ग्रहण करता और पचाता हुआ स्पष्ट दिखता है, वह है:
> औदारिक शरीर (Audārika Sharir) – यही “अहार पहचानने वाला” मुख्य शरीर है।
सरल भाषा में:
- औदारिक शरीर = यह हमारा स्थूल देह है – मांस, हड्डी, रक्त आदि वाला शरीर।
- इसी के द्वारा:
बाकी के शरीर (तेजस, कार्मण, वैक्रिय, आहारक) सूक्ष्म हैं; वे ऊर्जा, कर्म बंधन, रूप परिवर्तन आदि से जुड़े हैं, सीधे–सीधे स्थूल आहार की पहचान और सामान्य खाने–पीने से नहीं।
इसलिए भरत क्षेत्र में मनुष्य आदि के संदर्भ से कहा जा सकता है:
> अहार को प्रत्यक्ष रूप से पहचानने और ग्रहण करने वाला प्रमुख, एक मात्र स्थूल शरीर – औदारिक शरीर है।
पाँचों शरीर के बारे में सरल जानकारी के लिए आप यहाँ पढ़ सकते हैं