Bharat shetra ke anusaar ek matra karma jo charma shariri nahi bandhata
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भारत क्षेत्र के अनुसार “चरम शरीरी जीव” (जिसका यह अन्तिम जन्म है) एक ही प्रकार का कर्म कभी नहीं बाँधता – वह है आयुष्य कर्म (आयु‑कर्म)।
सरल भाषा में:
- चरम जन्म में उसकी अगली कोई देह नहीं बननी, इसलिए
- वह नया आयुष्य‑कर्म (अगले जन्म की आयु तय करने वाला कर्म) नहीं बाँधता।
- बाकी सात प्रकार के कर्म (ज्ञानावरण, दर्शनावरण, वेदनीय, नाम, गोत्र, मोहनीय, अन्तराय) तो चरम शरीरी में भी पहले से बँधे होते हैं और उदय‑क्षय आदि चलते रहते हैं; पर नया आयु‑कर्म का बन्ध नहीं होता।
इसलिए आपके प्रश्न का उत्तर: ➡︎ आयुष्य कर्म ही वह एकमात्र कर्म है जो चरम शरीरी जीव नहीं बाँधता।