ચક્રવર્તી કે રતન કિતને ઔર કૌન સે
जैन धर्म में चक्रવર્તી के Ratna (रत्न / रતન) दो तरह से बताए जाते हैं:
1. सप्तरत्न – 7 रत्न (सबसे प्रसिद्ध सूची)
अधिकतर जैन ग्रंथों में चक्रवर्ती के ७ रत्न माने जाते हैं:- चक्ररत्न – दिव्य चक्र (सुदर्शन चक्र जैसा दिव्य आयुध)
- रत्निनि / महाराणी – उत्तम गुणों वाली मुख्य रानी
- गज-सेना – हाथियों की महान सेना
- अश्व-सेना – घोड़ों की विशाल सेना
- रथ-सेना – रथों की बड़ी सेना
- नाथनिधि / मणिरत्न – बहुमूल्य रत्न, गहने, धन–निधि
- धनरत्न / कोश – अपार धन, खजाना, राज्य–सम्पत्ति
इनको मिलकर “सप्तरत्न” कहा जाता है। यही सबसे प्रचलित मानी जाने वाली सूची है। ( jainknowledge.com)
2. नवरत्न या 14 रत्न
कुछ जैन ग्रंथों व परम्पराओं में चक्रवर्ती के- ९ रत्न (नवरत्न) या
- १४ रत्न
संक्षेप में
- चक्रवर्ती के मुख्य रत्न = 7 (सप्तरत्न)
- परम्परा के अनुसार कभी–कभी ९ या १४ भी बताए जाते हैं, पर जैन शास्त्रों में जो सबसे सामान्य है, वह सप्तरत्न ही है।
आप चक्रवर्ती के चिन्ह और रत्नों के बारे में और भी सरल भाषा में पढ़ना चाहें तो यहाँ देख सकते हैं