जैन भजन प्रस्तुत करें
नीचे एक सरल और भावपूर्ण जैन भजन प्रस्तुत है, जिसे आप प्रार्थना, सामायिक या स्वाध्याय के समय गा सकते हैं:
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जैन भजन
- हे अरिहंत देवा, वंदन तुजको,
तीर्थों के तू आधार। ज्ञान-ज्योति से जीवन मेरा, कर दे निर्मल, सदा उजियार॥
- सिद्ध प्रभु ऊँचे मुक्त धाम में,
रहे सदा आनंद मगन। हम भी कर्मों के बंधन तोड़ें, जागे भीतर शुद्ध आत्म-चेतन॥
- आचार्य गुरुवर धर्म-पथदर्शक,
तुमसे सीखी संयम-रीत। सत्य, अहिंसा, अपरिग्रह की, भर दो दिल में पावन प्रीत॥
- उपाध्याय ज्ञान के सागर,
शास्त्रों का तुमने दिया प्रकाश। मोह-अंधेरा दूर हो हमारा, जगे विवेक और सम्यक-विचार॥
- साधु-साध्वी चरणों में वंदन,
तप और जप का अद्भुत रूप। देख तुम्हारा शांत विरागीपन, हममें भी जागे त्याग का रूप॥
- हे जिनवाणी, पावन वाणी,
तू ही हमारी सच्ची राह। राग-द्वेष सब मिट जाएँ भीतर, जगे क्षमा, करुणा की चाह॥
- नमः सिद्धेभ्यः, नमः अरिहंतैः,
नम आचार्यादि गुरुजन। सकल संघ का हो मंगल-कल्याण, शुभ हो हम सबका जीवन॥
- हे जिनदेव! दे ऐसा मन,
ना किसी जीव का हो अपकार। सबमें आत्मा को देख सकें हम, यही हो तेरा सच्चा संस्कार॥
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यदि आप चाहें तो मैं इसी भजन के लिए सरल स्वर/तालयुक्त गाने की शैली या छोटा-सा रिफ़्रेन (दोहराने वाली पंक्तियाँ) भी लिख सकता हूँ, ताकि इसे समूह में गाना और आसान हो जाए।