Kamat ne marudhati kese mara
आपका प्रश्न "कामट ने मरूदेवी को कैसे मारा?" जैन धर्म से संबंधित है। जैन धर्म के अनुसार, मरूदेवी राजा नाभिराय की रानी और भगवान ऋषभदेव (आदिनाथ) की माता थीं। कामट और मरूदेवी की कथा पूर्व जन्मों की कहानियों में आती है, जो कर्म सिद्धांत को स्पष्ट करने के लिए बताई जाती है।
जैन पुराणों के अनुसार, कामट और मरूदेवी के बीच का संबंध उनके पूर्वजन्मों से जुड़ा है। एक जन्म में, कामट और मरूदेवी दोनों साधु-साध्वी थे। उस जन्म में, कामट ने मरूदेवी (तब साध्वी) के प्रति द्वेषभाव रखा और उन्हें कष्ट पहुँचाया था। उस द्वेष और कष्ट के कारण कामट ने बहुत भारी पाप बंधा, जिसके फलस्वरूप आगे के जन्मों में उसे अनेक बार दुर्गति (नरक, तिर्यंच आदि) में जन्म लेना पड़ा।
किंतु, जैन धर्म के अनुसार, मरूदेवी को कामट ने प्रत्यक्ष रूप से नहीं मारा। बल्कि, यह कथाएँ इस बात को समझाने के लिए हैं कि हमारे किए गए कर्मों का फल हमें आगे जन्मों में भुगतना पड़ता है। कामट का द्वेष और हिंसा का भाव ही उसके दुर्गति जाने का कारण बना, जबकि मरूदेवी पुण्य के कारण मोक्ष को प्राप्त हुईं।
इस प्रकार, जैन दर्शन में यह कथा कर्म सिद्धांत और अहिंसा के महत्व को स्पष्ट करने के लिए कही जाती है, न कि किसी प्रत्यक्ष हत्या या हिंसा को दर्शाने के लिए।