Parshwnath bhagwan ke pichle bhav m kya the
भगवान पार्श्वनाथ जी जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर हैं। उनके पिछले भव (पूर्व जन्म) का वर्णन जैन साहित्य में विस्तार से मिलता है।
जैन परंपरा के अनुसार, भगवान पार्श्वनाथ जी का पिछला जन्म "वासुदेव" नामक राजा के रूप में हुआ था। विशेष रूप से, वे अपने पिछले भव में "मरुभूमि" नगरी के राजा "अश्वसेन" और रानी "वामादेवी" के पुत्र थे। उस जन्म में भी उन्होंने पुण्य और तप का संचय किया था, जिससे वे इस भव में तीर्थंकर बनने के योग्य बने। भगवान पार्श्वनाथ के जीवन में करुणा, अहिंसा और तपस्या की विशेष भूमिका थी।
एक अन्य उल्लेख के अनुसार, उनके पिछले भव में वे "धरणेन्द्र" नामक नागकुमार के रूप में भी उत्पन्न हुए थे, जो उनके समकालीन थे और जिन्होंने पार्श्वनाथ भगवान की तपस्या के समय उनकी रक्षा भी की थी।
संक्षेप में, भगवान पार्श्वनाथ के पूर्व जन्म पुण्यशाली, धर्मनिष्ठ और करुणामय थे, जिससे वे इस जन्म में तीर्थंकर पद को प्राप्त कर सके।