रौद्र ध्यान के भेद बताएं
रौद्र ध्यान के भेद (जैन दर्शन के अनुसार) चार हैं:
- हिंसानन्द रौद्र ध्यान (हिंसा से आनन्द लेना)
जब कोई जीवों को मारने, दुख देने, तंग करने, बदला लेने आदि के विचारों में ही सुख अनुभव करे, वही हिंसानन्द रौद्र ध्यान है।
- मृषानन्द रौद्र ध्यान (झूठ से आनन्द लेना)
झूठ बोलने, धोखा देने, कपट करने, गलत बात फैलाने, षड्यंत्र रचने आदि की योजनाओं में आनन्द लेना – यह मृषानन्द रौद्र ध्यान है।
- चौर्यानन्द रौद्र ध्यान (चोरी से आनन्द लेना)
चोरी करने, हड़पने, दूसरों की वस्तु अन्याय से लेने, भ्रष्ट तरीकों से धन कमाने की योजनाओं में लगे रहना और उसमें खुशी मानना – यह चौर्यानन्द रौद्र ध्यान है।
- विषय‑संरक्षणानन्द रौद्र ध्यान (इन्द्रिय‑विषयों की रक्षा में आनन्द लेना)
धन, संपत्ति, पद, परिवार, भोग‑विलास आदि की रक्षा के लिए हर समय चिंता, षड्यंत्र, कठोर कदम, हिंसा तक की योजना बनाते रहना – यह विषय‑संरक्षणानन्द रौद्र ध्यान है।
संक्षेप में: जब मन हिंसा, झूठ, चोरी और इन्द्रिय‑विषयों की रक्षा जैसे पापभावों में डूबकर उन्हीं में आनन्द ले, तो उसे रौद्र ध्यान कहते हैं। दिगम्बर और श्वेताम्बर – दोनों परम्पराओं में मूल भेद यही चार माने गए हैं।