2 stree ya jisne haste khelte karma bandhe??
आपका प्रश्न "2 स्त्री या जिसने हँसते खेलते कर्म बाँधे?" जैन धर्म के सिद्धांतों से संबंधित है।
जैन धर्म के अनुसार, "हँसते खेलते कर्म बाँधना" का तात्पर्य यह है कि जीव अपने जीवन में अज्ञानता, आसक्ति, मोह आदि के कारण अनजाने में, बिना किसी विशेष दुःख या चिंता के, सहजता से भी कर्म बाँध लेता है। यह कर्म बंधन हँसी-खुशी, सामान्य जीवन जीते हुए भी हो सकता है, जब तक कि विवेक, संयम और सम्यक् दर्शन का अभाव रहता है।
जहाँ तक "2 स्त्री" की बात है, जैन धर्म में "स्त्री" शब्द का अर्थ नारी मात्र से ही नहीं, बल्कि आसक्ति या आकर्षण का भी सूचक है। "2 स्त्री" से तात्पर्य हो सकता है—(1) नारी के प्रति आकर्षण (पुरुष के लिए) और (2) पुरुष के प्रति आकर्षण (नारी के लिए)। इस तरह की वासना या आसक्ति भी कर्म बंधन का कारण बनती है।
संक्षेप में: हँसते-खेलते कर्म बाँधने का अर्थ है—सामान्य जीवन में, बिना किसी विशेष बुरे भाव के भी, अज्ञानवश, मोहवश, या आसक्ति के कारण जीव कर्म बाँधता रहता है। इसी प्रकार, स्त्री-पुरुष के पारस्परिक आकर्षण (या दो तरह की स्त्री भावनाएँ) भी कर्म बंधन का कारण बनती हैं।
यदि आप किसी विशेष जैन शास्त्र या संदर्भ के बारे में पूछना चाहते हैं तो कृपया विस्तार से बताएं।