उडद के बाकुले देखने के बाद किसकी याद आयी
उड़द के बाकुले (उड़द की सूखी उबली दाल) देखने पर सामान्यतः चंदनबाला (चंदना) की याद की जाती है।
जैन परंपरा में प्रसिद्ध है कि भगवान महावीर को दीक्षा के बाद बहुत समय तक उचित आहार नहीं मिला। अंत में उन्हें चंदनबाला ने ही अपने हिस्से के उड़द के बाकुले अत्यन्त श्रद्धा और शुद्ध भावना से अर्पित किए।
इसीलिए प्रवचन‑साहित्य या प्रश्नोत्तरी में पूछा जाता है – “उड़द के बाकुले देखने के बाद किसकी याद आई?” तो उत्तर होता है: चंदनबाला की।