सभी गछ की जानकारी
“गच्छ” शब्द से आप श्वेतांबर मूर्तिपूजक परंपरा के अलग‑अलग संघ/परम्पराएँ (तपा‑गच्छ, खर्तर‑गच्छ आदि) पूछ रहे हैं, ऐसा लगता है। सब सभी गच्छों की पूरी और विस्तार से सूची व इतिहास बहुत बड़ा विषय है, पर मैं आपको सरल रूप में मुख्य बात समझा देता हूँ।
1. गच्छ क्या होता है?
जैन धर्म में विशेषकर श्वेतांबर मूर्तिपूजक परम्परा में एक आचार्य या आचार्य-मंडल की परंपरा से बना साधुसंघ समय के साथ अलग पहचान ले लेता है, उसे ही “गच्छ” कहते हैं।
- हर गच्छ का:
- मूल सिद्धांत (अहिंसा, अनिकेत, अपरिग्रह, पंचव्रत, सम्यग्दर्शन आदि) सभी में एक जैसे हैं; अंतर केवल व्यवहार, भाषा, पूजा‑पद्धति, वेश आदि में थोड़े‑बहुत होते हैं।
2. श्वेतांबर मूर्तिपूजक के प्रमुख गच्छ (संक्षेप में)
सिर्फ समझ के लिए कुछ प्रसिद्ध गच्छों के नाम:
- तपा‑गच्छ (Tapa Gaccha)
- श्वेतांबर मूर्तिपूजक में संख्या व प्रभाव से सबसे बड़ा गच्छ माना जाता है। - आचार्य देवेंद्र सूरी, हीरसूरि, महेन्द्रसूरि आदि जैसे कई प्रसिद्ध आचार्य इसी गच्छ से हुए।
- खर्तर‑गच्छ (Khartargaccha)
- राजस्थान, गुजरात आदि में विशेष प्रभाव। - कई पुराने जिनालय, ग्रंथ, साधु‑परम्पराएँ इस गच्छ से जुड़ी हैं।
- आनन्दजी कल्याणजी पंथ से जुड़े गच्छ/संघ
- मंदिर‑प्रबंध, तीर्थ ट्रस्ट आदि के माध्यम से अलग पहचान; पर यह अधिक “संघ/ट्रस्ट” जैसा ढाँचा है, न कि शुद्ध गच्छ नाम की तरह।
- अन्य छोटे‑बड़े गच्छ / संघ
- जैसे: त्रिस्तुतिक गच्छ, ब्रह्मश्रमण संघ आदि – क्षेत्र विशेष में जाने जाते हैं; पर सामान्य गृहस्थों के लिए व्यवहार में मुख्य रूप से तपा‑गच्छ और खर्तर‑गच्छ के नाम अधिक चलते हैं।
(हर गच्छ के अंदर भी कई उप‑संघ, मंडल, स्थानीय परम्पराएँ होती हैं, जिनके नाम क्षेत्र के अनुसार बदल जाते हैं।)
3. दिगम्बर परंपरा में “गच्छ” की जगह क्या है?
दिगम्बर समाज में “गच्छ” शब्द उतना प्रचलित नहीं; वहाँ आम तौर पर:
- संघ / परम्परा कहा जाता है
- आज के समय में प्रायः
4. सिद्धांत में क्या अंतर है?
- मूल दर्शन (तत्त्व, सप्त तत्त्व, कर्म सिद्धांत, मोक्ष‑मार्ग) सभी गच्छों में एक ही है, क्योंकि सबका आधार आगम और प्रामाणिक आचार्यों के ग्रंथ हैं।
- अंतर मुख्यतः:
5. व्यावहारिक रूप से आपको क्या जानना चाहिए?
अगर आप:
- अपना गच्छ पहचानना चाहते हैं – तो अपने घर/मंदिर में जिनकी आराधना होती है, जिन आचार्य के नाम से “आज्ञा” ली जाती है, वे किस गच्छ के हैं, वही आपका गच्छ माना जाएगा।
- किसी खास गच्छ के बारे में (जैसे केवल “तपा‑गच्छ” या “खर्तर‑गच्छ”) विस्तार से इतिहास, मुख्य आचार्य, विशेष नियम आदि जानना चाहें, तो उस एक गच्छ पर अलग से पूछें – उस पर मैं ज़्यादा साफ, क्रमवार जानकारी दे सकता हूँ।
पूरी तरह से “सभी गच्छ” की विस्तृत सूची बनाना यहाँ संभव नहीं है, पर ऊपर दी गई बातों से आपको गच्छ की परिभाषा, मुख्य नाम और अंतर की सरल समझ हो जाएगी।