किस तीर्थंकर को दिन 1 mein ज्ञान 2 hue the in jasm
आपका प्रश्न थोड़ा अस्पष्ट है, इसलिए पहले उसे समझना ज़रूरी है।
आपने लिखा है: “किस तीर्थंकर को दिन 1 mein ज्ञान 2 hue the in jasm”
यह दो‑तीन तरह से समझ में आ सकता है:
- क्या आप पूछ रहे हैं:
“किस तीर्थंकर को एक ही दिन में दो बार ज्ञान (जैसे: केवलज्ञान) हुआ था?” – अगर ऐसा पूछ रहे हैं, तो जैन सिद्धांत के अनुसार ऐसा नहीं होता। केवलज्ञान एक ही बार होता है, और उसके बाद साधु केवलज्ञानी अरिहंत बन जाते हैं। दो बार ज्ञान होना मान्य नहीं है।
- या आप यह पूछना चाह रहे हैं:
“किस दिन दो तीर्थंकरों को (अलग‑अलग) ज्ञान हुआ था?” जैसे – किसी विशेष तिथि पर दो अलग तीर्थंकरों को केवलज्ञान / मोक्ष आदि? – अगर आपका प्रश्न यह है, तो कृपया यह स्पष्ट करें कि आप: - केवलज्ञान (केवलज्ञान प्राप्ति) के बारे में पूछ रहे हैं, - या मोक्ष (निर्वाण) के बारे में, - या जन्म/दीक्षा/केवलज्ञान/मोक्ष में से कुछ और?
- “दिन 1 में ज्ञान 2” से आपका अर्थ यह भी हो सकता है कि
पहले ही दिन (जन्म के दिन) दो प्रकार का ज्ञान हुआ? जैसे जन्मजात ज्ञान आदि – अगर आप यह पूछ रहे हैं, तो भी कृपया साफ‑साफ लिखें कि: - आप किस प्रकार के ज्ञान (मतिज्ञान, श्रुतज्ञान, केवलज्ञान आदि) की बात कर रहे हैं?
कृपया अपना प्रश्न दोबारा, थोड़ा साफ शब्दों में लिखें, जैसे:
- “किस तीर्थंकर को एक ही दिन में केवलज्ञान और मोक्ष मिला?”
- या “किस तिथि को दो तीर्थंकरों को केवलज्ञान प्राप्त हुआ?”
- या “जन्म के दिन कौन‑सा ज्ञान हुआ?”
आप जैसे ही स्पष्ट करेंगे, मैं परंपरागत जैन आगम के अनुसार सरल और सही उत्तर दूँगा।