Kaunsa gyan अच्छा नहीं है in jainism
Jainism में “ज्ञान अपने‑आप में बुरा” नहीं होता, लेकिन गलत दिशा वाला ज्ञान या असत्य को सत्य मानने वाला ज्ञान अच्छा नहीं माना जाता।
बहुत सरल भाषा में:
1. मिथ्या ज्ञान – अच्छा नहीं
जब कोई- आत्मा, कर्म, पुनर्जन्म, तत्त्व आदि के बारे में
- गलत समझ रखता है और उसे ही सही मानता है,
तो इसे मिथ्या ज्ञान / मिथ्या दृष्टि कहा जाता है।
यह ज्ञान:
- मोह, राग‑द्वेष बढ़ाता है
- पाप और बुरे कर्म बाँधता है
- मुक्ति के रास्ते से दूर ले जाता है
इसलिए मिथ्या ज्ञान अच्छा नहीं है।
2. सम्यक ज्ञान – अच्छा
जब ज्ञान:- सही तत्त्वों पर आधारित हो (जीव, अजीव, पुण्य, पाप, आस्रव, बंध, संवर, निर्जरा, मोक्ष)
- राग‑द्वेष कम करे
- करुणा, अहिंसा, संयम बढ़ाए
तो उसे सम्यक ज्ञान कहा जाता है, और वही अच्छा व उपयोगी ज्ञान है।
3. केवल किताबें याद होना = पर्याप्त नहीं
- बहुत शास्त्र याद हों, पर
- स्वभाव में अहंकार, क्रोध, लालच, कपट हो,
तो ऐसा “सूचना वाला ज्ञान” भी आध्यात्मिक दृष्टि से अच्छा नहीं माना जाता, क्योंकि वह आत्मकल्याण नहीं कर रहा।
संक्षेप में:
- जो ज्ञान असत्य को सत्य बनाए, मोह बढ़ाए = अच्छा नहीं (मिथ्या ज्ञान)
- जो ज्ञान सत्य तत्त्व दिखाए, मोह घटाए, मोक्ष‑मार्ग पर लगाए = अच्छा (सम्यक ज्ञान)