आज उपयोगी, कल रद्दी in one word in jainism
इसका एक शब्द में जैन धर्म का निकटतम भाव है:
“अनित्य” (या अनित्यत्व)
अर्थ: जो आज उपयोगी है, कल व्यर्थ हो सकता है – यानी सब द्रव्य, परिस्थिति, सम्बंध आदि नित्य स्थिर नहीं हैं, बदलते रहते हैं। यह भावना ही अनित्यत्व-भावना कहलाती है।
जैन दृष्टि से:
- सब पदार्थ उपादेय (लेने योग्य) और हेय (छोड़ने योग्य) रूप में बदलते रहते हैं
- इसलिए उन्हें पकड़ कर बैठना ठीक नहीं, यह समझना अनित्य का अभ्यास है
तो “आज उपयोगी, कल रद्दी” – जैन शब्दावली में इसे अनित्य / अनित्यत्व से जोड़ा जाता है।