Kewalgyan le baad pratham 3 shabd kya hote hai
जैन धर्म के अनुसार, जब कोई तीर्थंकर या अरिहंत केवलज्ञान (केवलज्ञान: सर्वज्ञता) प्राप्त करते हैं, तो वे पहली बार दिव्यध्वनि (दिव्य वाणी) प्रकट करते हैं। इस दिव्य वाणी के प्रारंभिक तीन शब्द माने जाते हैं:
- "धम्मं सरणं पवज्जामि"
- "संघं सरणं पवज्जामि"
- "अहिंसा परमोधर्म:"
परंतु, श्वेतांबर और दिगंबर परंपराओं में कुछ भिन्नता भी पाई जाती है। कुछ मान्यताओं के अनुसार, केवलज्ञान प्राप्त करने के बाद सर्वप्रथम जो शब्द प्रकट होते हैं, वे "अहो सुखम्! अहो सुखम्! अहो सुखम्!" (अर्थात "क्या सुख है!") होते हैं।
मुख्य रूप से, यह मानी जाती है कि केवलज्ञान के बाद वाणी के प्रारंभिक शब्द "अहो सुखम्" होते हैं, जो तीन बार बोले जाते हैं।
संक्षेप में: केवलज्ञान के बाद प्रकट होने वाले प्रथम तीन शब्द हैं — "अहो सुखम्! अहो सुखम्! अहो सुखम्!"
इसका अर्थ है: "क्या सुख है! क्या सुख है! क्या सुख है!" यह शब्द आत्मा की परम शुद्धि और आनंद की अनुभूति को दर्शाते हैं।