Varshita KeBaare mein Bataye
Varshitap (जिसे वार्षीतप / वर्षी तप भी कहते हैं) एक बहुत ऊँचा और कठिन tap (तपस्या) है, जो लगभग एक साल तक चलता है।
1. Varshitap क्या है?
- “Varshi / Varsha” = वर्ष (year)
- “Tap” = तपस्या / austerity
- यह एक पूरे साल तक चलने वाला, एक दिन उपवास – एक दिन भोजन वाला तप है।
- प्रेरणा: यह तप भगवान ऋषभदेव (आदिनाथ) की वर्षभर की उपवास‑लीला की स्मृति में किया जाता है।
आप विस्तार से यहाँ पढ़ सकते हैं:
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2. कैसे किया जाता है? (सामान्य रूप)
थोड़ा बहुत नियम परम्परा और गुरु‑मर्यादा से बदल सकते हैं, पर सामान्य रूप:- अवधि: लगभग 1 साल (अक्सर 13 चंद्र मास + 13 दिन के बराबर)
- पैटर्न:
- कुछ विशेष तिथियों (चौदस, आदि) पर लगातार दो उपवास भी रखने पड़ सकते हैं – यह सब अपने गुरु की आज्ञा से होता है।
विधि का सरल विवरण यहाँ देख सकते हैं:
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3. कब शुरू होता है और कब पूरा होता है?
(श्वेताम्बर परम्परा में प्रचलित तरीका – स्थानीय पंचांग से तिथि देखी जाती है)- शुरू: प्रायः चैत्र शुक्ल अष्टमी से
- समापन (पर्णा): अगले वर्ष वैशाख शुक्ल तृतीया (अक्षय तृतीया) पर
- पर्णा के दिन पारम्परिक रूप से ईख / गन्ने के रस से उपवास तोड़ा जाता है, जैसे भगवान ऋषभदेव ने किया था।
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4. आध्यात्मिक महत्व
- यह बहुत ऊँची तपस्या मानी जाती है।
- मुख्य उद्देश्य:
- यह सिर्फ “भूखा रहना” नहीं, बल्कि:
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5. Digambar और Shwetambar दृष्टि
- दोनों परम्पराओं में Varshitap बहुत गौरवशाली तप माना जाता है।
- फर्क मुख्यतः:
- लेकिन भावना और उद्देश्य – आत्मशुद्धि, संयम, मोक्ष‑मार्ग की प्रगति – दोनों में समान है।
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6. किनके लिए और कैसी तैयारी?
- शारीरिक और मानसिक रूप से सक्षम श्रावक‑श्राविकाएँ, और मुनिराज / आर्यिकाएँ उचित मार्गदर्शन में कर सकते हैं।
- यह बहुत कठिन तप है, इसलिए:
- बीमार, बुज़ुर्ग, गर्भवती स्त्री, छोटे बच्चों के लिए सामान्यतः यह उपयुक्त नहीं माना जाता।
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संक्षेप में: Varshitap = भगवान ऋषभदेव की वर्ष‑भर की उपवास‑लीला की स्मृति में, एक साल तक एक दिन उपवास – एक दिन सीमित भोजन की कठोर तपस्या, जिसका उद्देश्य सिर्फ शरीर को कष्ट देना नहीं, बल्कि आत्मा को पवित्र करना और मोक्ष‑मार्ग पर आगे बढ़ना है।