कौन से मंत्र की माला गिनना चाहिए
जैन धर्म में सबसे श्रेष्ठ और सुरक्षित मंत्र की माला जपने के लिए:
1. नवकार (णमोकार) मंत्र की माला
दोनों परंपराएँ – श्वेतांबर और दिगंबर – मानती हैं कि नवकार / णमोकार मंत्र की माला गिनना सबसे उत्तम है।मंत्र (प्राकृत):
- णमो अरिहंताणं।
- णमो सिद्धाणं।
- णमो आयरियाणं।
- णमो उवज्झायाणं।
- णमो लोए सव्वसाहूणं॥
- एसो पंच नमोक्कारो, सव्व पावप्पणासणो।
- मंगलाणं च सव्वेसिं, पढमं हवई मंगलं॥
क्यों यही माला जपें?
- यह किसी एक देवता से कुछ माँगने का मंत्र नहीं है।
- यह केवल पाँच परमेष्ठियों (अरिहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय, साधु) के गुणों की वंदना है।
- इससे पाप क्षय और शुभ भावना बढ़ती है।
- श्वेतांबर–दिगंबर दोनों में मान्य, इसलिए सर्वमान्य और निष्कंटक है।
2. कितनी माला जपें?
आप अपनी क्षमता और समय के अनुसार कर सकते हैं:- १ माला (१०८ बार)
- ३ माला, ९ माला, या जितना नियमित रख सकें।
3. जपने का सही तरीका (संक्षेप में)
- शांत, स्वच्छ स्थान पर पद्मासन/सुखासन में बैठें।
- मन में क्रोध–राग–द्वेष छोड़ने का संकल्प लें।
- संभव हो तो मन ही में (मानसिक जप) करें, नहीं तो धीमे स्वर में।
- जप के समय दुनियावी इच्छाएँ न रखें, केवल आत्मशुद्धि और पंच परमेष्ठी के गुणों का स्मरण करें।
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