please translate prakrit siddh bhakti in hindi
नीचे प्राकृत सिद्ध भक्ति का सरल हिन्दी अर्थ (भावार्थ) दिया है।
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(1) प्रथम गाथा
प्राकृत: सम्मत्त-णाण-दंसण-वीरिय-सुहुमं तहेव अवगहणं। अगुरु-लघु-मव्वावाहं, अट्ठगुणा होंति सिद्धाणं ॥ 1 ॥सरल हिन्दी अर्थ: जिन आत्माओं ने
- सम्यक ज्ञान (सही और पूर्ण ज्ञान),
- सम्यक दर्शन (सही श्रद्धा),
- सम्यक चरित्र व वीर्य (उत्तम तप और पुरुषार्थ)
- न तो भारी हैं, न हल्के (देह से परे, कर्म से रहित),
- और जो आठ परम गुणों से युक्त सिद्ध हैं,
(यहाँ आठ गुण से तात्पर्य सिद्धों के अनन्त ज्ञान, अनन्त दर्शन, अनन्त सुख आदि गुणों से है।)
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(2) द्वितीय गाथा
प्राकृत: तव-सिद्धे णय-सिद्धे, संजम-सिद्धे चरित्तसिद्धे य। णाणम्मि दंसणम्मि य, सिद्धे सिरसा णमस्सामि ॥ 2 ॥सरल हिन्दी अर्थ: जो तप के द्वारा सिद्ध हुए, जो नयों (सही दृष्टिकोण/नय) के द्वारा सिद्ध हुए, जो संयम (व्रत, नियम) के द्वारा सिद्ध हुए, और जो श्रेष्ठ चरित्र (आचार) के द्वारा सिद्ध हुए हैं, तथा जो ज्ञान और दर्शन में सिद्ध हैं – ऐसे सब सिद्ध भगवानों को मैं सिर झुकाकर नमस्कार करता/करती हूँ।
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(3) अंचलिका (इच्छामि भंते …) – भावार्थ
प्राकृत (आदि भाग): इच्छामि भंते! सिद्धभत्ति काउस्सग्गो कओ तस्सालोचेउं…
सरल हिन्दी अर्थ (संकलित):
हे प्रभु! मैं सिद्ध भक्ति का कायोत्सर्ग (शरीर स्थिर रखकर ध्यान) करना चाहता/चाहती हूँ और उसका आलोचना (अपने दोषों की समीक्षा) करना चाहता/चाहती हूँ।
मैं उन सभी सिद्ध भगवानों की वन्दना करता/करती हूँ –
- जो सम्यक ज्ञान, सम्यक दर्शन और सम्यक चरित्र से युक्त हैं,
- जो आठों प्रकार के कर्मों से पूरी तरह मुक्त हो चुके हैं,
- जो आठ महान गुणों से सम्पन्न हैं,
- जो लोक के सर्वोच्च भाग (सिद्धशिला) पर स्थित हैं,
- जो तप से सिद्ध, नय से सिद्ध, संयम से सिद्ध, और चरित्र से सिद्ध हुए हैं,
- जो भूत (अतीत), भविष्य (अनागत) और वर्तमान – तीनों कालों के सिद्ध हैं,
- और जो सभी सिद्ध, सदा-सर्वदा पूजनीय हैं।
ऐसे सभी सिद्धों को मैं नित्य – आंचल (श्रद्धा सहित मन), पूजन, वन्दन और नमस्कार करता/करती हूँ कि –
- मेरा दुःख नष्ट हो,
- मेरे कर्म नष्ट हों,
- मुझे सम्यक ज्ञान, सम्यक दर्शन और सम्यक चरित्र की प्राप्ति हो,
- मुझे उत्तम गति (शुभ भव) मिले,
- मेरा मृत्यु समय समाहित (शान्त, समाधि-मरण) हो,
- और मुझमें जिनेन्द्र भगवान के गुणों की प्राप्ति हो।
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यह अनुवाद भावार्थ है – शब्दशः नहीं, बल्कि प्रार्थना की भावना को सरल हिन्दी में प्रकट करता है, ताकि पाठ करते समय अर्थ मन में स्पष्ट रहे।