a se batao keval gyan hote hai 16 prahar ke desna de
केवलज्ञान (Kevalgyan) प्राप्त होने के बाद भगवान तीर्थंकर या केवलज्ञानी आत्मा 16 प्रहर (या 48 घंटे) तक देशना (उपदेश) देते हैं, ऐसा जैन आगमों में उल्लेख मिलता है। इसे 16 प्रहर की देशना या दिव्यध्वनि भी कहा जाता है।
16 प्रहर का अर्थ: एक दिन और एक रात में 8-8 प्रहर होते हैं, इस प्रकार 16 प्रहर कुल 48 घंटे होते हैं।
देशना का क्रम — जैन परंपरा के अनुसार:
- केवलज्ञान की प्राप्ति:
जब कोई आत्मा कर्मों का पूर्ण क्षय कर लेती है, तब उसे केवलज्ञान (सर्वज्ञता) प्राप्त होती है।
- दिव्यध्वनि:
केवलज्ञानी के मुख से दिव्यध्वनि निकलती है, जो सभी जीवों को उनकी-उनकी भाषा में उपदेश प्रदान करती है।
- 16 प्रहर की देशना:
केवलज्ञान प्राप्ति के बाद प्रथम 16 प्रहर तक केवलज्ञानी भगवान देशना देते हैं। इस दौरान सभी लोकों के जीव, देव, मनुष्य, तिर्यंच आदि उपस्थित होकर धर्म का उपदेश ग्रहण करते हैं।
- देशना का उद्देश्य:
इस देशना में सम्यक् दर्शन, सम्यक् ज्ञान, सम्यक् चरित्र, पंच महाव्रत, अहिंसा, अपरिग्रह, और मोक्ष मार्ग का उपदेश दिया जाता है।
- इसके बाद:
उसके बाद तीर्थंकर भगवान विश्राम करते हैं या साधारण जीवन निर्वाह करते हैं, लेकिन दिव्यदेशना केवल 16 प्रहर तक ही होती है।
सारांश: केवलज्ञान प्राप्त होने के बाद भगवान 16 प्रहर (48 घंटे) तक धर्म की देशना देते हैं, जिसे दिव्यध्वनि के रूप में सभी जीव सुन सकते हैं। यह जैन आगमों व परंपरा का एक महत्वपूर्ण तथ्य है।