समथल भूमि से नक्षत्र और गुरुग्रह कितना योजन ऊपर है ??
जैन धर्म के अनुसार, ब्रह्माण्ड का वर्णन तिलोक (त्रिलोक) के रूप में किया गया है। इसमें समथल भूमि (मध्यलोक) से ऊपर नक्षत्र मंडल और ग्रहों का स्थान निर्धारित है।
जैन आगमों के अनुसार:
- समथल भूमि (जंबूद्वीप आदि) के ऊपर लगभग 1,00,000 योजन तक आकाश (आकाशवासी देवों का स्थान) है।
- नक्षत्र मंडल (तारिका मंडल) के बारे में बताया गया है कि यह समथल भूमि से लगभग 1,40,000 योजन ऊपर है।
- ग्रह (गुरु, शुक्र, बुध, आदि) और नक्षत्र मंडल एक ही स्तर के आसपास माने गए हैं, यानी इनकी ऊँचाई समथल भूमि से लगभग 1,40,000 योजन बताई जाती है।
यह माप जैन आगम "लोकविभाग" और "तत्त्वार्थ सूत्र" जैसी ग्रंथों में मिलती है। ध्यान दें कि 'योजन' एक प्राचीन माप है, जो लगभग 12-13 किलोमीटर के बराबर होता है, लेकिन जैन गणना में यह माप कभी-कभी भिन्न भी हो सकता है।
सारांश: समथल भूमि से नक्षत्र एवं ग्रह मंडल लगभग 1,40,000 योजन ऊपर स्थित माने गए हैं।
स्रोत:
- तत्त्वार्थ सूत्र (अध्याय 3, लोकविभाग)
- जैन लोकविज्ञान ग्रंथ