Give me slok number 4 with regard to प्रोषध प्रतिमा from विमल ज्ञान प्रबोधिनी टीका in chapter श्रावक प्रतिक्रमण
श्रेणी – प्रोषध प्रतिमा ग्रंथ – विमल ज्ञान प्रबोधिनी टीका (श्रावक प्रतिक्रमण अध्याय) श्लोक क्रमांक – ४
मूल श्लोक (प्राकृत): उत्तम मज्झ जहण्ण, तिविहं पोसहविहाण मुद्दिद्ठ । सगसत्तीएमासम्मि, चउसु पत्वेसु कायव्य ।।४।।
(मुद्रणानुसार: “सगसत्तीएमासम्मि, चउसु पत्वेसु कायव्य” इत्यादि)
सरल भावार्थ (संक्षेप में): प्रोषध-विधान तीन प्रकार का बताया गया है – उत्तम, मध्यम और जघन्य। श्रावक को अपनी शक्ति के अनुसार एक मास में चार पर्वों (दो अष्टमी और दो चतुर्दशी) में प्रोषध-व्रत करना चाहिये।