एक मात्र शरीर जो स्त्री को कभी नहीं मिलता in jain agam
जैन आगम के अनुसार –
पाँच प्रकार के शरीर माने गये हैं:
- औदारिक शरीर
- वैक्रियिक शरीर
- आहारक शरीर
- तैजस शरीर
- कार्मण शरीर
इनमें “आहारक शरीर” (Āhārak śarīr) ऐसा शरीर है जो स्त्री को कभी नहीं मिलता।
संक्षेप में कारण:
- आहारक शरीर केवल छठे गुणस्थान (प्रमत्त‑संयत) वाले मुनि को होता है।
- आगम‑टीकाओं में इसके लिए स्पष्ट शर्त रखी है कि वह मुनि भाव से पुरुष‑वेद वाला हो।
- इसलिए जिन जीवों में स्त्री‑वेद या नपुंसक‑वेद है, उन्हें आहारक शरीर की प्राप्ति नहीं होती।
- परम्परा में “मुनि” यहाँ विशेष रूप से पुरुष संयमी साधु माने गये हैं; इसी से कहा जाता है कि आहारक शरीर स्त्री को नहीं मिलता।
इस प्रकार, जैन आगम की शिक्षा के अनुसार