औदारिक शरीर, तेजस शरीर, आहारक शरीर का अन्तर बताये
औदारिक शरीर, तेजस शरीर और आहारक शरीर – ये तीनों पुद्गल (सूक्ष्म द्रव्य) से बने विशेष प्रकार के शरीर हैं। इनका अन्तर सरल भाषा में ऐसे समझिए:
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1. औदारिक शरीर (Audarik Sharir)
क्या है? यह हमारा मोटा (स्थूल) शरीर है – जो दिखता, छूता, कटता, जलता है।
किसके पास होता है? मनुष्य, तिर्यंच (जानवर-पक्षी आदि), नरक वासी, देव कुछ विशेष रूप में – सबका जो स्थूल शरीर है, वह औदारिक कहलाता है।
विशेषताएँ
- जन्म से मृत्यु तक दिखने वाला साधारण देह
- खाने-पीने, रोग, वृद्धावस्था, चोट आदि सब इसे ही लगती है
- पंचेन्द्रिय जीवों का मुख्य बाह्य शरीर यही है
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2. तेजस शरीर (Tejas Sharir)
क्या है? यह ऊर्जा / ताप जैसा सूक्ष्म शरीर है – जो स्थूल शरीर (औदारिक) को शक्ति, ताप, पाचन आदि देता है।
किसके पास होता है? सभी संसारिक जीवों के पास तेजस शरीर होता ही है, चाहे उनका स्थूल शरीर हो या न हो।
विशेषताएँ
- यह आँखों से नहीं दिखता, बहुत सूक्ष्म है
- भोजन के पाचन, शरीर की गर्मी, ऊर्जा आदि का कारण
- कर्म बंधन और उदय में भी इसकी भूमिका मानी जाती है
- शरीर छोड़ते समय (मरण के समय) जीव सबसे पहले औदारिक छोड़कर तेजस व कर्म शरीर के साथ ही अगला जन्म लेता है
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3. आहारक शरीर (Aaharak Sharir)
क्या है? यह विशेष योग से बनाया गया बहुत सूक्ष्म शरीर है, जिसे केवल उच्च साधक मुनिराज ही बना सकते हैं।
किसके पास होता है?
- यह सामान्य रूप से सबके पास नहीं रहता।
- केवल कुछ महान मुनि इसे समय-विशेष पर बनाते हैं।
क्यों बनाते हैं?
- जब मुनिराज को बहुत दूर स्थित अरिहंत के पास
विशेषताएँ
- अत्यन्त सूक्ष्म व तेज गति से चलने वाला
- थोड़े ही समय के लिए अस्तित्व – कार्य पूर्ण होते ही समाप्त
- यह शरीर केवल धर्मोपयोग (आध्यात्मिक कार्य) के लिए ही बनता है, किसी भोग या लौकिक काम के लिए नहीं
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मुख्य अन्तर (संक्षेप में)
- प्रकृति / स्थूलता
- औदारिक – स्थूल, प्रत्यक्ष दिखने वाला शरीर - तेजस – ऊर्जा/ताप वाला सूक्ष्म शरीर - आहारक – विशेष योग से बना, अत्यन्त सूक्ष्म अस्थायी शरीर
- उपयोग
- औदारिक – सामान्य जीवन, व्यवहार, खाने-पीने, काम-काज आदि - तेजस – शरीर को ऊर्जा, ताप, पाचन, कर्मों के उदय में सहयोग - आहारक – मुनि द्वारा अरिहंत के पास धर्म-सम्बन्धी शंका समाधान के लिए
- कौन रखता है?
- औदारिक – सभी पंचेन्द्रिय स्थूल देह वाले जीव - तेजस – लगभग सभी संसारिक जीव - आहारक – केवल उच्च कोटि के मुनिराज, वह भी समय-विशेष पर ही
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इस प्रकार,
- औदारिक = हमारा सामान्य मोटा शरीर
- तेजस = ऊर्जा / प्रकाश / ताप जैसा सूक्ष्म शरीर
- आहारक = खास योग से बना, मुनिराज का “धर्मिक यात्रा” वाला सूक्ष्म शरीर
इसी को इन तीनों शरीरों का मुख्य अन्तर कहा जाता है।