एक मात्र karma जो सबसे बेस्ट है in jain agam
जैन आगम में “एक ही कर्म सबसे बेस्ट है” – ऐसा नाम लेकर किसी एक कर्म (एक्शन) को अकेले सर्वश्रेष्ठ नहीं कहा गया है।
लेकिन मूल सिद्धांत साफ है:
- सबसे ऊँचा कर्म =
आगमों में बार‑बार जिन बातों को “श्रेष्ठ” कहा गया है, वे हैं:
- अहिंसा – “अहिंसा परमोधर्मः”
हर जीव को न दुख पहुँचाना – यह सब धर्मों में सर्वोपरि माना गया है।
- सम्यक दर्शन की प्राप्ति
सही दृष्टि (देव‑गुरु‑धर्म पर अटूट, निर्मोही श्रद्धा) – यह आत्मा के लिए सबसे बड़ा कल्याणकारी कर्म माना गया है, क्योंकि यहीं से मोक्षमार्ग शुरू होता है।
- क्षमा, नम्रता, संयम आदि दशधर्म (दशलक्षण)
जैसे उत्तम क्षमा, उत्तम मार्दव, उत्तम आरजव, आदि – ये सब आत्मा को पवित्र करने वाले श्रेष्ठ कर्म हैं।
इसलिए जैन आगम की भाषा में कहें तो:
- “सबसे बेस्ट एक कर्म” पूछने की बजाय
- “जो भी कर्म अहिंसा, संयम और सम्यक दर्शन‑ज्ञान‑चारित्र बढ़ाए – वही सर्वोत्तम कर्म है।”
साधारण शब्दों में: अपने‑आपको और किसी भी जीव को कम से कम हानि पहुँचाते हुए, आत्मा की शुद्धि के लिए किया गया हर प्रयत्न – यही जैन आगम के अनुसार सबसे ऊँचा कर्म है।