yes, list me names of popular books which are written on difficult, rare and technical words for Prakrit and Hindi which are explained in saral Hindi
नीचे मैं ऐसे कुछ प्रसिद्ध ग्रंथों के नाम दे रहा हूँ जिनमें Prakrit (ख़ासकर जैन प्राकृत / अर्धमागधी) और जैन‑संबंधित कठिन / दुर्लभ / तकनीकी शब्दों का अर्थ सरल हिन्दी (या बहुत सुगम भाषा) में दिया गया है।
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1. प्राकृत (जैन प्राकृत / अर्धमागधी) के लिए
- “अर्धमागधी कोश” – आ. रत्नचन्द्र महाराज
- कई भागों में प्रकाशित (भाग 1–5)। - जैन प्राकृत / अर्धमागधी के बहुत कठिन, दुर्लभ और तकनीकी शब्दों के अर्थ सरल हिन्दी (साथ में अन्य भाषाओं) में मिलते हैं। - जैन आगम पढ़ने वालों के लिए सबसे अधिक उपयोग में लाया जाने वाला कोश।
- “प्राकृत‑हिन्दी व्याकरण” (Prakrit Hindi Vyakaran) – शाकुन्तला जैन, सम्पा. डॉ. कमलचन्द सोगानी
- मुख्य रूप से व्याकरण की पुस्तक है, परन्तु इसके प्राकृत शब्दावली / शब्द‑सूची भाग में बहुत से प्राकृत शब्दों के अर्थ सीधे सरल हिन्दी में दिए गये हैं। - शुरुआती विद्यार्थियों के लिए काफ़ी उपयोगी। - इसके बारे में संक्षिप्त जानकारी और अध्ययन‑सामग्री का मार्गदर्शन यहाँ दिया है: प्राकृत स्टडी मटीरियल
- “हिन्दी अर्धमागधी रीडर” – पं. बनारसी दास जैन
- अर्धमागधी के पाठों के साथ सरल हिन्दी अर्थ और टीका। - जैन आगम की भाषा से परिचय कराने के लिए बनाई गई पाठ्य‑पुस्तक, कठिन शब्दों के अर्थ भी दिये रहते हैं।
- विविध “जैन प्राकृत रीडर / पाठ्य‑पुस्तकें”
(अलग‑अलग संस्थाओं द्वारा) - कई पुस्तकों में नीचे या हाशिये पर प्राकृत के कठिन शब्दों का हिन्दी में शब्दार्थ दिया होता है – विशेषकर - कल्पसूत्र - उत्तरााध्ययन सूत्र - भगवती सूत्र के “हिन्दी अनुवाद व शब्दार्थ सहित” संस्करण।
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2. जैन तकनीकी / दुर्लभ शब्दों के लिए (मुख्यतः हिन्दी माध्यम)
- “वृहद् जैन शब्दार्णव” – मा. बिहारीलाल
- जैन दर्शन, आचार, कर्मसिद्धान्त, जैन भूगोल, पौराणिक नाम आदि से जुड़े हजारों कठिन शब्दों के अर्थ सरल भाषा में। - बहुत उद्धृत होने वाला बड़ा कोश।
- “जैन पारिभाषिक शब्दकोश” (या जैन पारिभाषिक शब्दकोश / Jain Paribhashika Shabdakosha) – महोपाध्याय चन्द्रप्रभ सागर आदि
- जैन दर्शन के विशिष्ट तकनीकी शब्दों की व्याख्या सीधे सरल हिन्दी में। - साधारण पाठक और विद्यार्थियों – दोनों के लिए उपयोगी।
- “जैन दर्शन : पारिभाषिक कोश” – (ऑनलाइन रूप में भी उपलब्ध)
- लगभग 1500 के आसपास जैन दर्शन से जुड़े शब्दों के संक्षिप्त लेकिन स्पष्ट हिन्दी अर्थ। - जैसे – आश्रव, बन्ध, संवर, निरjara, मोक्ष, पुद्गल, जीव, अजीव आदि।
- “जैन शब्दकोश / जैन शब्दार्थ कोश / जैन शब्दकोश” शीर्षक से निकले अलग‑अलग कोश
- अलग‑अलग लेखकों द्वारा, पर उद्देश्य एक ही – जैन ग्रन्थों में प्रयुक्त कठिन संस्कृत / प्राकृत / हिन्दी शब्दों को सरल हिन्दी में समझाना। - पुस्तकालयों में “जैन शब्दकोश”, “जैन शब्दार्थ कोश”, “जैन कोश” जैसे नामों से मिल जाते हैं।
- “अनेकार्थ रत्न मञ्जूषयम्” – हीरालाल आर. कपाड़िया
- अधिक विद्वत‑स्तर की पुस्तक है; - एक ही शब्द के अनेक अर्थ (अनेकार्थ) को सूचीबद्ध करती है – जैन ग्रन्थों के संदर्भ सहित। - हिन्दी अर्थ के साथ‑साथ संदर्भ भी मिल जाते हैं, इसलिए शोध करने वालों के काम की है।
- जैनकोष (ऑनलाइन “शब्द कोश”)
- एक डिजिटल जैन शब्द‑कोश, जहाँ आप कोई भी जैन शब्द लिखकर उसका अर्थ देख सकते हैं। - अधिकांश शब्दों के अर्थ बहुत सरल हिन्दी में दिये गये हैं, जिससे कठिन शब्द तुरंत समझ आ जाते हैं।
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3. उपयोग की छोटी‑सी सलाह
- अगर आपका लक्ष्य आगम / प्राकृत ग्रन्थ पढ़ना है
- अगर आपका लक्ष्य जैन दर्शन के टेक्निकल शब्द समझना है
इन पुस्तकों से धीरे‑धीरे शब्दों की आदत बन जाएगी, फिर मूल प्राकृत / हिन्दी जैन शास्त्र पढ़ना काफ़ी आसान लगेगा।