Mahavir swami ke kaal me nandisenji kaise the aur sundari ji kaisi thi
भगवान महावीर के समय जिन नन्दीसेन और सुन्दरी की कथा सुनाई जाती है, वह मुख्य रूप से उनके स्वभाव और मोह पर आधारित है, न कि बहुत ज़्यादा उनके रूप‑रंग के वर्णन पर। संक्षेप में:
नन्दीसेन जी कैसे थे?
- बहुत धनवान गृहस्थ (श्रावक) बताए गए हैं।
- अपनी पत्नी सुन्दरी से अत्यन्त आसक्त – एक‑दूसरे से अलग रहना पसन्द नहीं करते थे।
- संसार की दृष्टि से अच्छे, प्रेम करने वाले पति, लेकिन जैन दृष्टि से:
- बाद में भगवान महावीर के उपदेश से उन्हें अनित्य (सब नश्वर है) का ज्ञान होता है और उनका मोह ढीला पड़ता है – यही इस कथा का मुख्य संदेश है।
सुन्दरी जी कैसी थीं?
- सुन्दरी को ग्रन्थों में सामान्यतः
- उनका भी नन्दीसेन की तरह दाम्पत्य‑मोह (पति‑पत्नी का चिपका हुआ लगाव) बहुत अधिक था।
- कथा का ज़ोर यह दिखाने पर है कि:
जैन दृष्टि से सार
- नन्दीसेन–सुन्दरी की कथा में
- भगवान महावीर का उद्देश्य था कि:
इसलिए संक्षेप में:
- नन्दीसेन जी – धनवान, प्रेमी पति, पर अत्यधिक आसक्त गृहस्थ।
- सुन्दरी जी – रूपवती, पति‑से‑प्रेम करने वाली, पर मोह में बंधी हुई गृहिणी।
कथा हमें यह सिखाती है कि घर‑गृहस्थी और प्रेम बुरा नहीं, पर उनमें डूब कर आत्मा को भूल जाना बन्धन है।