सबको ज्ञान प्रदान करने वाली काली वस्तु कौन सी है in jainism
जैन धर्म में ऐसी कोई “काली वस्तु” नहीं बताई गई है, जिसे शास्त्रों में इस तरह से परिभाषित किया गया हो कि “सबको ज्ञान प्रदान करने वाली काली वस्तु” – यह कोई मान्य, पारिभाषिक (technical) जैन धर्म की संज्ञा नहीं है।
जैन दृष्टि से:
- सच्चा ज्ञान देने वाला
- शास्त्र भले काली स्याही से लिखे जाएँ, या कागज/पत्तों पर हों, पर जैन धर्म में उनका महत्व रंग से नहीं,
जो पहेलियाँ आम भाषा में चलती हैं (जैसे – काली चीज़ जो सबको ज्ञान देती है = “स्याही”, “काली पट्टी” आदि), वो सामान्य पहेलियाँ हैं, विशेष रूप से जैन धर्म की परिभाषित चीज़ नहीं मानी जातीं।
इसलिए जैन धर्म के अनुसार ज्ञान का मूल स्रोत – आत्मा की शुद्ध अवस्था, तीर्थंकरों का उपदेश और शास्त्र हैं, न कि किसी रंग या “काली वस्तु” का कोई विशेष सिद्धान्त।