Grha pravesh vidhi
जैन धर्म में “गृह प्रवेश” के लिए कोई अलग से वेदिक / ज्योतिषीय हवन‑यज्ञ वाली तय पूजा नहीं बताई गई है। जैन दृष्टि से नया घर बसाते समय मुख्य बात है – शुद्धि, अहिंसा, सादगी और जिनेंद्र‑स्मरण।
नीचे एक सरल जैन रीति से गृह‑प्रवेश विधि दी है, जिसे आप अपनी सुविधा के अनुसार कर सकते हैं:
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1. घर की बाहरी / भीतर की शुद्धि
- घर अच्छी तरह साफ कर लें – झाड़ू‑पोछा, जाले हटाना आदि।
- रसोई, स्नानघर, टॉयलेट जगहें विशेष साफ‑सुथरी रखें।
- जहाँ जिनमंदिर या पूजा‑स्थान बनाना है, वह कोना सबसे ज्यादा स्वच्छ, शांत और ऊँचा रखने की कोशिश करें।
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2. जिनमंदिर / पूजा‑स्थान की व्यवस्था
- एक साफ चौकी या छोटा आसन रखकर उस पर सफेद कपड़ा बिछाएँ।
- उस पर भगवान जिनेंद्र (तीर्थंकर की प्रतिमा / चित्र) स्थापित करें।
- पास में:
- धूप‑दीप (अगरबत्ती / दीपक) - स्वच्छ जल का पात्र - पुष्प या अक्षत (चावल) – जितना सरल रखें उतना अच्छा
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3. गृह प्रवेश से पहले संकल्प
- परिवार के सभी सदस्य स्नान कर, साफ सादा वस्त्र पहनें (यथाशक्ति सफेद)।
- घर के मुख्य द्वार पर छोटा सा स्वस्तिक (कुमकुम / चंदन से) बना सकते हैं।
- सब लोग मिलकर नवकार मंत्र का जाप करें –
- कम से कम 9, 18 या 108 बार (जितना सहज हो)।
- मन में यह भावना रखें –
- “इस घर में किसी भी प्रकार की हिंसा, झूठ, चोरी, मद्य‑आदि नहीं होगा; यह घर धर्म, शांति और सादगी का स्थान होगा।”
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4. जिनेन्द्र पूजा (सरल विधि)
आप बहुत सरल अष्ट‑प्रकारी / एक‑प्रकारी पूजा जैसा कर सकते हैं:
- नमस्कार (नमस्कार मुद्रा या पंचांग प्रणाम)
- नवकार मंत्र – सामूहिक उच्चारण
- यदि हो सके तो:
- थोड़ी देर स्वाध्याय करें – छोटा पाठ: “तत्त्वार्थ सूत्र”, “जिनचैत्य वंदना”, “भक्तामर स्तोत्र” के कुछ श्लोक इत्यादि।
- अंत में फिर से नमस्कार करें और मंगल पाठ बोलें, जैसे:
- “सकल जिनेन्द्र भगवंतों की जय हो, सबका मंगल हो, किसी जीव को कष्ट न पहुँचे।”
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5. घर में प्रवेश – क्रम
- पहले जिनमंदिर / पूजा‑स्थान पर जाएँ, भगवान के सामने दीपक / धूप जलाएँ।
- फिर पूरा परिवार शांतिपूर्वक घर के सभी कमरों का एक चक्कर लगाएँ –
- चलते‑चलते धीरे से नवकार, “णमो अरिहंताणं…” या “श्री महावीर स्वामी की जय” बोल सकते हैं।
- रसोई में:
- गैस / चूल्हा के पास छोटा दीया जलाकर नवकार बोलें। - भावना रखें कि “यहाँ बना भोजन अहिंसक, सादा और सात्त्विक होगा।”
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6. दान और अहिंसा की भावना
- सामर्थ्य हो तो उस दिन एक समय का उपवास / ओलो‑खालो / साधारण आहार रखें।
- किसी जरूरतमंद को अन्न / वस्त्र / औषधि / शिक्षा‑सहायता आदि देना बहुत शुभ माना जाता है।
- नये घर में:
- मांस, अंडा, शराब, तम्बाकू आदि न लाने का निश्चय करें। - जैन आहार नियम (कम से कम – अंडा, मास, शराब का पूर्ण त्याग; आगे बढ़कर लहसुन‑प्याज, कंद‑मूल आदि से भी बचने की प्रेरणा) रखें।
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7. क्या‑क्या न करें (जैन दृष्टि से)
- पशु‑बलि, हवन में घी‑आदि की आहुति को “देवताओं को खिलाना” मानकर हिंसक कर्म‑बन्ध की भावना – ये सब जैन सिद्धान्त के अनुरूप नहीं हैं, इसलिए न करें।
- ज्योतिष‑आधारित “नक्षत्र, ग्रह शांति” के नाम पर जटिल कर्मकाण्ड पर ज़ोर न दें;
- जैन धर्म में मुख्य मुहूर्त – सम्यक भावना और अहिंसा है।
- अनावश्यक शोर‑शराबा, नाच‑गाना, हिंसक‑प्रवृत्ति वाले भोज (नॉन‑वेज पार्टी आदि) को गृह‑प्रवेश का हिस्सा न बनाएं।
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इस तरह बहुत सरल, शुद्ध और जैन‑धर्मी तरीके से आप नया घर आरंभ कर सकते हैं। यदि आप इसी विषय पर और पढ़ना चाहें तो यह चर्चा उपयोगी है: Jain गृह‑प्रवेश से सम्बन्धित प्रश्न–उत्तर देखें