After taking diksha does maharaj ji take aahar for 6 months
नहीं, ऐसा कोई नियम नहीं है कि दीक्षा के बाद महाराज जी 6 महीने तक आहार नहीं लेते।
कुछ बातें स्पष्ट समझिए:
- मुनिराज का आहार (गोष्ठी / गोचरी)
- दीक्षा लेने के बाद मुनिराज रोज़ (या अपने नियम के अनुसार) आहार लेते हैं। - वे केवल एक बार आहार लेते हैं, वह भी भिक्षा के रूप में, खड़े होकर, पात्र में जितना आ जाए उतना। - वे घर–जैसा पकवान, पसंद–नापसंद, बार–बार भोजन आदि नहीं करते, पर पूरी तरह 6 महीने तक बिना आहार रहना सामान्य नियम नहीं है।
- लंबे उपवास (तप)
- कुछ महान तपस्वी साधु दीक्षा के समय या किसी विशेष अवसर पर बहुत लंबा तप करते हैं – जैसे 1 महीना, 2 महीने या और अधिक लगातार उपवास। - ऐसे उदाहरणों से लोगों में यह बात फैल जाती है कि “6 महीने तक आहार नहीं लेते”, जबकि यह सामान्य नियम नहीं, बल्कि कुछ विरल, असाधारण तप के उदाहरण होते हैं।
- दोनों परंपराओं में (दिगंबर / श्वेतांबर)
- दोनों ही परंपराओं में मूल नियम यह है कि साधु मर्यादित, संयमित, एक बार का भिक्षा-आहार लेते हैं। - लगातार 6 महीने तक कभी भी आहार नहीं लेना – ऐसा कोई सार्वभौमिक आगमीय नियम नहीं बताया जाता।
सार: दीक्षा के बाद मुनिराज जी सामान्यतः नियमित रूप से, लेकिन बहुत साधा और संयमित तरीका अपनाकर, एक समय भिक्षा-आहार लेते हैं। 6 महीने तक नितांत बिना आहार के रहना कोई सामान्य/ज़रूरी नियम नहीं है; यह केवल कुछ विशेष महातपों के रूप में ही कहीं-कहीं देखने को मिलता है।