तुरन्त दान का महापुण्य किसको मिला था in jainism
जैन धर्म में “तुरन्त दान का महापुण्य” की सबसे प्रसिद्ध घटना राजा श्रेयांसकुमार से जुड़ी मानी जाती है।
- जब भगवान आदिनाथ (ऋषभदेव) दीक्षा लेकर कई दिनों से निर्वाह (आहार) के अभाव में विहार कर रहे थे, तब किसी को यह समझ ही नहीं आ रहा था कि अब संन्यासी को क्या और कैसे दान दिया जाए।
- केवल राजा श्रेयांसकुमार को अपने पूर्व जन्म की स्मृति से यह ज्ञान हुआ कि तपस्वी को आहार‑दान देना है।
- उन्होंने तुरंत ही भगवान ऋषभदेव को इक्षुरस (गन्ने का रस) का आहार‑दान दिया।
- यह पहला आहार‑दान और “तुरंत किया गया दान” था, जिसके कारण राजा श्रेयांसकुमार को अत्यन्त महापुण्य प्राप्त हुआ और उसी दिन से दान‑परंपरा का शुभ आरंभ माना जाता है (अक्षय तृतीया का महत्व भी इसी से जुड़ा है)।
इसलिए, “तुरन्त दान का महापुण्य” राजा श्रेयांसकुमार को मिला था, जब उन्होंने भगवान ऋषभदेव को इक्षुरस का आहार‑दान दिया।