परमात्मा का दान क्या कहलाता है in jainism
जैन दृष्टि से “परमात्मा का दान” किसे कहेंगे, इसे सरल रूप में ऐसे समझें:
- परमात्मा (अरिहंत / सिद्ध) स्वयं किसी को भौतिक वस्तु नहीं देते।
वे तो वितराग, कर्मरहित, केवल ज्ञान-वाले होते हैं – आसक्ति रहित, इसलिए “लेना–देना” उनके लिए नहीं रहता।
- फिर “परमात्मा का दान” क्या है?
जैन शास्त्रों के अनुसार सबसे श्रेष्ठ दान धर्मदान / ज्ञानदान है – सही सम्यक् दर्शन, सम्यक् ज्ञान और मोक्षमार्ग का उपदेश। यही उपदेश, यही सही जैन धर्म-ज्ञान वास्तव में परमात्मा का दान कहलाता है, क्योंकि: - इसी से जीव अज्ञान के अंधकार से निकलता है - कर्मबंध कम करने और मोक्ष की दिशा समझने की शक्ति मिलती है ( jainknowledge.com)
- दान के चार मुख्य भेद बताए गए हैं –
- अन्न दान (आहार दान) - औषध दान - ज्ञान दान (विद्या / धर्म का दान) - अभय दान (डर, हिंसा से छुटकारा देना) इनमें से ज्ञान दान को सर्वोत्तम कहा गया है – यही वास्तव में परमात्मा का सबसे बड़ा उपकार-रूप “दान” माना जाता है। ( jainknowledge.com)
संक्षेप उत्तर: परमात्मा का दान = धर्म का दान / ज्ञान दान – अर्थात् सही जैन धर्म, मोक्षमार्ग और सम्यक् ज्ञान का उपदेश।