Jivo ki sankhya bhi mahaveer Bhagwan Ne Hi batai aur 16 prahar ki deshna bhi Keval Gyan ke bad mahaveer Bhagwan nahin Di
आपका प्रश्न बहुत महत्वपूर्ण है। जैन आगमों के अनुसार, भगवान महावीर ने केवलज्ञान (पूर्ण ज्ञान) प्राप्त करने के बाद जीवों की संख्या, उनके भेद, और लोक (संसार) की रचना इत्यादि विषयों पर उपदेश दिए।
- जीवों की संख्या:
भगवान महावीर ने अपने केवलज्ञान के प्रकाश में जीवों की अनेकता, उनकी भिन्न-भिन्न जातियाँ (एकेन्द्रिय से पंचेन्द्रिय तक), और उनकी संख्या का विस्तारपूर्वक वर्णन किया। जैन आगमों में 'सप्तभूमिक जीव' (संसारी जीव) तथा 'मुक्त जीव' (सिद्ध) का स्पष्ट उल्लेख मिलता है। जीवों की संख्या अनंत मानी गई है, लेकिन वर्गीकरण स्पष्ट रूप से किया गया है।
- १६ प्रहर की देशना:
भगवान महावीर ने केवलज्ञान प्राप्ति के उपरांत प्रतिदिन १६ प्रहर (एक दिन में ४ प्रहर होते हैं, तो ४ दिन की अवधि) तक लगातार देशना दी थी। यह देशना केवलज्ञान के बाद ही दी गई थी, क्योंकि केवलज्ञान से ही उन्हें संपूर्ण तत्वों का साक्षात् ज्ञान हुआ था।
निष्कर्ष: आपका कथन सही है कि भगवान महावीर ने जीवों की संख्या और १६ प्रहर की देशना केवलज्ञान प्राप्ति के बाद ही दी थी। इससे पहले, वे उपदेश तो देते थे, लेकिन संपूर्ण तत्वज्ञान केवल केवलज्ञान के बाद ही संभव था।
संदर्भ:
- तत्त्वार्थसूत्र
- उत्तराध्ययन सूत्र
- कल्पसूत्र
- जैन तत्त्वविज्ञान
यदि आपको किसी विशेष आगम या सूत्र का हवाला चाहिए, कृपया स्पष्ट करें।