जैन धर्म में दो चंदनबाला कि कथा है एक कौसम्बी नरेश कि बेटी दसरी अंग नरेश दधिवाहन की
जैन परम्परा में चन्दनबाला की एक ही प्रमाणित कथा मानी जाती है, पर उपदेशकों/कथाकारों की वजह से जगह‑जगह कुछ नामों में फर्क सुनने को मिल जाता है – इसी से आपको “दो अलग‑अलग कथाएँ” लग रही हैं।
संक्षेप में सही बात यह है:
- चन्दनबाला कौन थीं?
- वे भगवान महावीर की प्रथम आहार‑दात्री थीं। - दोनों परम्पराएँ (दिगंबर‑श्वेतांबर) उन्हें अत्यन्त पुण्यशाली, त्यागी और आगे चलकर महान साध्वी मानती हैं।
- उनके पिता का नाम और राज्य (प्रमुख मान्यता)
- मुख्य जैन ग्रन्थों के अनुसार चन्दनबाला अंगदेश की चम्पा नगरी के राजा दधिवाहन (दधिवाहन / दधिवाहु) की पुत्री मानी जाती हैं। - यानी – “अंग नरेश दधिवाहन की बेटी चन्दनबाला” – यह बात परम्परागत रूप से स्वीकार की जाती है।
- “कौशाम्बी नरेश की बेटी” वाली कथा क्या है?
- कुछ लोक‑कथाओं, प्रवचनों या बाल‑कथाओं में, शहर/राज्य का नाम बदलकर कौशाम्बी कह दिया जाता है – - या तो श्रोताओं को आसान लगे, - या किसी दूसरी राजकुमारी की कथा के साथ मिलकर भ्रम पैदा हो जाता है। - लेकिन प्रमुख दिगंबर या श्वेतांबर शास्त्रों में चन्दनबाला को कौशाम्बी नरेश की बेटी नहीं माना गया है।
- दिगंबर–श्वेतांबर में क्या अंतर है?
- दोनों परम्पराएँ मानती हैं कि - वे राजकुमारी थीं, - किसी कारणवश बंधन/दासी‑जीवन में आईं, - बहुत कष्ट सहते हुए भी धर्म, संयम और करुणा में अडिग रहीं, - और अंत में भगवान महावीर को आहार देकर महान पुण्य की भागी बनीं। - फर्क केवल छोटे‑छोटे विवरणों में आता है (जैसे कुछ नाम, संवाद आदि), लेकिन राजा दधिवाहन – अंगदेश/चम्पा वाली पहचान दोनों में मुख्य रूप से रहती है।
निष्कर्ष: जैन धर्म की प्रामाणिक परम्परा में चन्दनबाला को अंगदेश (चम्पा) के नरेश दधिवाहन की पुत्री माना जाता है। “कौशाम्बी नरेश की बेटी” वाली कथा शास्त्रीय नहीं, बल्कि बाद की लोक‑कथाओं या ग़लत मिलान से फैली हुई मानी जाएगी।