इन्द्र ने अवधिज्ञान से जाना एक महाज्ञानी पहचाना
इस पंक्ति का सरल अर्थ:
“इन्द्र ने अवधिज्ञान से जाना, एक महाज्ञानी पहचाना”
- इन्द्र – स्वर्ग के देवों के राजा (इन्द्र देव), जो तीर्थंकर भगवान आदि महात्म आत्माओं के कल्याणक पर विशेष रूप से उपस्थित होते हैं।
- अवधिज्ञान – यह एक प्रकार का अलौकिक ज्ञान है, जिसमें साधक या देव बिना इन्द्रियों के, दूर की वस्तुओं और घटनाओं को सीधे जान लेते हैं। यह कर्मों के क्षय से प्राप्त होने वाला अप्रत्यक्ष ज्ञान है।
- एक महाज्ञानी पहचाना – अर्थात् इन्द्रदेव ने अपने अवधि-ज्ञान के द्वारा यह जान लिया कि कहीं पर कोई महान ज्ञानी आत्मा (जैसे भविष्य का तीर्थंकर, अरिहंत बनने योग्य आत्मा, या अत्यंत ऊँचे आध्यात्मिक स्तर वाली आत्मा) स्थित है।
पूरे वाक्य का सार:
इन्द्र देव ने अपने अवधि-ज्ञान के द्वारा किसी उच्च कोटि के महाज्ञानी, महान आत्मा को पहचान लिया। जैन परंपरा में यह प्रसंग अक्सर तीर्थंकर के गर्भ कल्याणक या किसी महान तपस्वी / ज्ञानी की पहचान से जुड़ा हुआ आता है – जहाँ इन्द्र देव दूर से ही अपने विशेष ज्ञान द्वारा उस महात्मा को पहचान लेते हैं।