क्या भगवान महावीर कि मुलाकात चंदनबाला से केवल ज्ञान प्राप्त होने के पश्चात हुआ
नहीं, भगवान महावीर की चंदनबाला से मुलाकात केवल केवलज्ञान (केवल-ज्ञान) प्राप्त होने के बाद नहीं हुई थी।
संक्षेप में क्रम इस प्रकार है:
- तपस्या के दौरान मुलाकात
- भगवान महावीर की कठोर साधना के लगभग 12वें वर्ष में - जब वे कई महीनों से निराहार (उपवास) थे - उसी समय दासी बनी हुई राजकुमारी वसुमती (जो आगे चलकर चंदनबाला कहलायी) के घर के बाहर उनसे भिक्षा की घटना होती है। - यह सब केवलज्ञान से पहले हुआ।
- चंदनबाला द्वारा भिक्षा देना
- भगवान महावीर ने बहुत कठोर ‘अभिग्रह’ (प्रतिज्ञा) लिया था कि वे विशेष लक्षणों वाली स्त्री से ही भिक्षा लेंगे। - चंदनबाला ने वही शर्तें पूर्ण कीं और उन्हें भिक्षा दी। - यह भिक्षा लेने के बाद ही उसी दिन आगे चलकर भगवान महावीर को केवलज्ञान की प्राप्ति हुई।
- केवलज्ञान के बाद
- केवलज्ञान प्राप्त होने के बाद भगवान महावीर ने संघ की स्थापना की। - तब चंदनबाला उनकी प्रथम शिष्या बनीं और 36,000 साध्वियों के संघ की प्रधान आर्यिका (मुख्य साध्वी) बनीं। - यह अवस्था बाद की है, लेकिन उनकी पहली मुलाकात और भिक्षा की घटना पहले ही हो चुकी थी।
इसलिए सही बात यह है कि