कहा जाता है कि चन्दनबाला को वैशाली लाया गया था
परंपरागत जैन कथाओं में चन्दनबाला के बारे में यह कहा जाता है कि:
- वह चम्पा (चम्पानगरी / चम्पापुरी) के राजा दधिवाहन और रानी धारिणी (या पद्मावती/धरणी) की पुत्री वसुमती थीं।
- राजा दधिवाहन पर कौशाम्बी के राजा शतानिक ने आक्रमण किया; युद्ध में चम्पा हार गया, और वसुमती (चन्दनबाला) को कैद करके कौशाम्बी ले जाया गया, जहाँ दास बाज़ार में उसे बेचा गया। ( jainsite.com)
मुख्य श्वेताम्बर‑दिगम्बर कथाओं में उसका वैशाली लाया जाना प्रमुख रूप से नहीं मिलता; कथा में उसका दासत्व और बाद में भगवान महावीर को आहार देना प्रायः कौशाम्बी के व्यापारी धनवाह / धनावह के घर की घटना के रूप में वर्णित है, न कि वैशाली की। ( jainpedia.org)
हाँ, कुछ ग्रन्थों और प्रवचनों में राजा‑रानियों के संबंध बताते समय वैशाली, कौशाम्बी और चम्पा – इन तीनों नगरों का उल्लेख साथ‑साथ आता है (जैसे – वैशाली के गणनायक चेड़क, उनकी पुत्रियाँ, चम्पा के दधिवाहन आदि), जिससे श्रोताओं में कभी‑कभी भ्रम हो जाता है कि चन्दनबाला को विशेष रूप से वैशाली लाया गया था; जबकि मुख्य कथानक के अनुसार उसे कौशाम्बी लाया‑बेचा गया माना जाता है। ( jainbelief.com)
संक्षेप में:
- जन्म‑स्थान: चम्पा
- दास‑बाज़ार / व्यापारी का घर: प्रायः कौशाम्बी माना जाता है
- वैशाली का नाम कथाओं में आता है, पर “चन्दनबाला को वैशाली लाया गया” – ऐसा मुख्य स्रोतों में प्रमुख मत नहीं है।